
शुक्रवार को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा उस वक्त हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब सदन के अंदर पक्ष और विपक्ष के बीच वार्डों की समस्याओं को लेकर तीखी बहस चल रही थी। इसी दौरान लिंगीयडीह क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर पिछले 84 दिनों से धरना दे रही महिलाएं बड़ी संख्या में नगर निगम पहुंच गईं। महिलाओं के पहुंचते ही ऑडिटोरियम का मेन गेट बंद कर दिया गया, जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। शुक्रवार को आयोजित सामान सभा में भारी होगा में का दौर देखने को मिला और कांग्रेस पार्षदों ने यहां धरना प्रदर्शन किया दर्शन लिंगियाडीह की कई महिलाएं अपनी मांग को लेकर नगर निगम की सामान्य सभा में पहुंची थी तो वहीं कांग्रेस पार्षद के द्वारा महापौर से उनसे मिलने को कहा गया लेकिन उसके बाद भी जब बात नहीं बनी तो मामले ने उग्र रूप ले लिया।मामले को शांत कराने के लिए वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल ने महापौर से आग्रह किया कि वे केवल दो मिनट चलकर महिलाओं से मिल लें और उनकी समस्या सुन लें।

लेकिन महापौर द्वारा इस मुद्दे को सदन के भीतर ही उठाने की बात कहे जाने पर विवाद और बढ़ गया। इसके बाद कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य महिलाओं के समर्थन में मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए और महापौर व नगर निगम प्रशासन पर तानाशाही के आरोप लगाए। कांग्रेस पार्षदों और महिलाओं का कहना था कि यदि महापौर मौके पर जाकर महिलाओं को यह आश्वासन दे दें कि उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे, तो प्रदर्शनकारी महिलाएं वापस लौट जाएंगी। वहीं दूसरी ओर महापौर का कहना था कि सामान्य सभा के दौरान इस तरह से प्रदर्शन करना उचित नहीं है और समस्याओं का समाधान नगर निगम के माध्यम से ही किया जाना। इस पूरे घटनाक्रम पर नगर निगम के सभापति विनोद सोनी ने कहा कि सदन में इससे पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच अपने-अपने तर्कों के साथ जमकर नोकझोंक हुई और सामान्य सभा का माहौल पूरी तरह गर्मा गया।




