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अमृत भारत योजना की जमीनी हकीकत उजागर उसलापुर स्टेशन पर धंसा प्लेटफॉर्म, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने का दावा किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से काम हो रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही है। बिलासपुर के उसलापुर रेलवे स्टेशन में प्लेटफॉर्म की ज़मीन धंस गई है और बाउंड्री वॉल झुक चुकी है। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसलापुर स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार को देखकर लगता है कि कोई बड़ा बदलाव हो रहा है। नई टाइलिंग, चमचमाती लाइट्स और रंगरोगन से सजा स्टेशन बाहरी तौर पर आकर्षक दिखता है। लेकिन जैसे ही यात्री प्लेटफॉर्म नंबर एक की तरफ बढ़ते हैं, हालात बदले हुए नजर आते हैं।

कटनी छोर पर प्लेटफॉर्म की ज़मीन एक तरफ से धंस चुकी है। बाउंड्री वॉल आधी झुकी हुई है और वहां बड़ी दरारें दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तो बारिश का मौसम शुरू भी नहीं हुआ है, और ऐसी हालत हो चुकी है। इससे साफ है कि निर्माण के दौरान मिट्टी के नीचे की परतों का ठीक से मूल्यांकन नहीं किया गया।लोगों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा काम में लापरवाही बरती जा रही है। कई जगहों पर सीमेंट की जगह मिट्टी से भराई की गई है, जिससे प्लेटफॉर्म कमजोर हो गया है। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर न तो ठेकेदार गंभीर हैं और न ही रेलवे के ज़िम्मेदार अधिकारी।सीनियर डीसीएम ने बताया कि यह अमृत भारत योजना के तहत हाल ही में शुरू किया गया कार्य है। शुरुआती चरण में ज़मीन की ‘सेटलिंग’ होती है।

विभाग को सूचित कर दिया गया है और मरम्मत का काम जल्द शुरू होगा। रेलवे मॉनसून में अलर्ट मोड पर रहता है। अधिकारियों की सफाई से फिलहाल राहत की उम्मीद तो जताई जा रही है,लेकिन यह भी सोचने की बात है कि करोड़ों की लागत से किए जा रहे निर्माण में इस तरह की लापरवाही क्यों हो रही है।क्या निर्माण से पहले भूगर्भीय परीक्षण नहीं किया गया।क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई।अमृत भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना अगर इस तरह लापरवाही के साथ क्रियान्वित होती है तो यह जनता के पैसों की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं। फिलहाल रेलवे ने मरम्मत के निर्देश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन यह देखना होगा कि यह मरम्मत स्थायी समाधान बनती है या फिर एक और लीपापोती साबित होती है।

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