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आंवला नवमी पर महिलाओं ने की आंवले के वृक्ष की पूजा, भक्ति और सौहार्द का दृश्य कंपनी गार्डन में

बिलासपुर। आंवला नवमी के पावन अवसर पर शहर के कंपनी गार्डन में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने-अपने समूहों के साथ यहां पहुंचीं और परंपरागत विधि-विधान से आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की। हर तरफ पूजा गीतों और भजनों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बन गया सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर थालियों में पूजा सामग्री, दीपक, फल-फूल और मिठाई लेकर कंपनी गार्डन पहुंचीं।

वृक्ष के चारों ओर जल चढ़ाकर, धूप-दीप प्रज्वलित कर महिलाओं ने आंवला नवमी की कथा सुनी और भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी का स्मरण किया। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखकर पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। आंवला नवमी को धर्मग्रंथों में अत्यंत पवित्र दिन माना गया है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और संतान की दीर्घायु के लिए विशेष रूप से यह व्रत करती हैं।

पूजन के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से घर से लाए गए विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का प्रसाद रूप में सेवन किया। पूड़ी, कढ़ी, खीर, पूरी सब्जी और मिठाइयों से सजे डिब्बे खोले गए और सभी ने मिलजुलकर आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन किया। इस दौरान आपसी मेलजोल और हंसी-खुशी का माहौल पूरे गार्डन में छाया रहा।कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने भजन-कीर्तन भी किए और एक-दूसरे को आंवला नवमी की शुभकामनाएं दीं।

समूहों में बैठी महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और धार्मिक कथा सुनाई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। श्रद्धा और विश्वास से ओतप्रोत इस आयोजन में बच्चों और बुजुर्गों की भी भागीदारी रही। 4आंवला नवमी पर कंपनी गार्डन में हुए इस सामूहिक आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का भी संदेश दिया। महिलाएं इस पर्व के माध्यम से न केवल भगवान का स्मरण करती हैं, बल्कि एक-दूसरे के साथ अपनापन और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती हैं। बिलासपुर में यह आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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