
राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ आजीविका डबरी योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूरे प्रदेश में दस लाख डबरियों का निर्माण किया जायेगा। सरकार का दावा है कि इस मॉडल के जरिए हर परिवार को कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक आय सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे ग्रामीण परिवारों को स्थायी आर्थिक सुरक्षा मिल सके। डबरी को छोटे लेकिन बहुउपयोगी जलस्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन डबरियों में वर्षा जल का संचयन कर मछली पालन, मुर्गी पालन और आसपास की जमीन पर सब्जी व अनाज की फसलें उगाने की व्यवस्था की जाएगी। एक ही परिसर में बहुआयामी आजीविका गतिविधियां संचालित होने से किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक आमदनी का अवसर मिलेगा। साथ ही, कम लागत में अधिक लाभ मिलने के कारण यह मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी व्यवहारिक माना जा रहा है।बिलासपुर जिले में योजना को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने अगले चार महीनों में एक हजार डबरियों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। संबंधित विभागों की टीम गांव–गांव पहुंचकर किसानों का चयन, भू-अधिपत्य का परीक्षण और तकनीकी सर्वे का काम कर रही है। जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल का कहना है कि निर्माण पूरा होते ही यहां मछली पालन और मुर्गी पालन की यूनिट स्थापित की जाएंगी, ताकि किसान जल्द से जल्द उत्पादन शुरू कर सकें। डबरी मॉडल न सिर्फ आय बढ़ाने का माध्यम बनेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। डबरियों में संरक्षित पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई, पशुओं की जरूरत और बागवानी के लिए किया जा सकेगा।




