
बिलासपुर में आफत की बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। एक तरफ सड़कों से लेकर घरों तक पानी ही पानी है, वहीं दूसरी तरफ निगम और बिजली विभाग के दावों की हकीकत भी खुलकर सामने आ गई है। सिरगिट्टी से तिफरा तक हर ओर जलभराव और प्रशासन की नाकामी की कहानी बयां कर रहा है। लगातार हो रही बारिश ने न सिर्फ शहर की गलियों को तालाब में तब्दील कर दिया है, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। जल निकासी व्यवस्था की बदहाली का आलम यह है कि निचले इलाकों में 6 से 7 फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।

सिरगिट्टी क्षेत्र में स्थित एक शासकीय स्कूल तो पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों को पढ़ाई के बीच में छुट्टी देनी पड़ी। कई स्कूलों में तो बच्चों के जूते से लेकर बैग तक पानी में भीग चुके हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।स्कूल के शिक्षक और स्थानीय लोग इस स्थिति से बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। सालों से वे इसी परेशानी से जूझ रहे हैं, लेकिन निगम और प्रशासन सिर्फ कागजों में समाधान खोजने का ढोंग करता रहा है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दावा है कि क्षेत्र में बगैर टीएनसी अप्रूवल के हुए अवैध निर्माण और नियम विरुद्ध कॉलोनियों की बाढ़ जैसी स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।

लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय दोषारोपण का खेल ही चलता आ रहा है।वहीं कुछ निवासियों का यह भी कहना है कि जनप्रतिनिधि भले सक्रिय हों, लेकिन सरकार में उनकी सुनवाई न होने के चलते इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नतीजा यह है कि लोग हर साल बारिश में अपने घरों और भविष्य दोनों को डूबते देख रहे हैं। ज़ी न्यूज़ की टीम ने जब सिरगिट्टी से लेकर तिफरा और यदुनंदन नगर तक की ग्राउंड रिपोर्टिंग की, तो हालात बेहद भयावह नजर आए। गलियों में नाव चलाने की नौबत, घरों में भरा गंदा पानी और बहते सीवेज ने इस बात की गवाही दी कि बिलासपुर का सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है।




