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उद्घाटन के दो दिन बाद ही अपेक्षा का शिकार हुआ वंदे मातरम उद्यान, उद्यान के चारों तरफ बेजाकब्जा,सुख रहे पौधे

शहर का नया वंदेमातरम् उद्यान इसे दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने जनता को समर्पित किया था, उद्घाटन के के साथ ही इसके बदहाली के दिन शुरू हो गए। जिस जगह को राष्ट्रभक्ति और सौंदर्य का प्रतीक बताया गया, वहां अब सूखी घास, बिखरी गंदगी और प्रशासनिक लापरवाही की कड़वी तस्वीर साफ दिखाई देती है। पुराना बस स्टैंड स्थित उद्यान बनाकर शहर के सौंदर्य मे चार चांद लगाने का वादा किया गया था, लेकिन उद्घाटन के दूसरे ही दिन घास सूखी पड़ी है, मतलब पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही। करोड़ों का एसटीपी और ड्यूल पाइपिंग परियोजना के दावे भी इस बदहाल ज़मीन पर मज़ाक जैसे लगते हैं।

शाम ढलते ही उद्यान में जानवरों की पूरी कमेटी जम जाती है, जो साफ बताती है कि सुरक्षा है और ना ही निगरानी। ऊपर से असामाजिक तत्वों का डेरा प्रशासन की चुप्पी को उजागर करता है। सरकार ने वंदेमातरम उद्यान को स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति का प्रतीक बताया था, लेकिन मौजूदा हालात यह दर्शा रहा है कि यह उद्यान सिर्फ उद्घाटन के दिन की शोभा था मतलब जनता के पैसे से बनाया गया एक और प्रोजेक्ट लोकार्पण के बाद किस्मत के भरोसे छोड़ दिया गया है। फिलहाल स्थिति यही है कि इस भव्य उद्यान का देखभाल के नाम पर हाल बेहाल है।

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