
भारतीय रेलवे ने तकनीकी प्रशिक्षण को एक नया आयाम देने की दिशा में बड़ी पहल की है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के उसलापुर स्थित विद्युत लोको प्रशिक्षण केंद्र में ‘बोगी पार्क’ तैयार किया गया है, जो न केवल प्रशिक्षुओं को लाइव ट्रेनिंग देगा बल्कि लोको पायलट्स की दक्षता को भी कई गुना बढ़ाएगा। रेलवे की इस नई अवधारणा ‘बोगी पार्क’ में अब थ्योरी नहीं, बल्कि असली माहौल में प्रशिक्षण मिल रहा है। पार्क में पारंपरिक और आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम वाली बोगियों के दो अलग-अलग स्टैंड बनाए गए हैं।

इसमें WAG-7, WAG-9 और WAP-4 जैसे इंजनों की बोगियां लगाई गई हैं, जिनकी मदद से ब्रेकिंग, कपलिंग और इमरजेंसी ऑपरेशन जैसी तकनीकें प्रत्यक्ष रूप में सिखाई जा रही हैं। साथ ही आरएस मॉडल के ज़रिए प्रशिक्षुओं को आपातकालीन स्थिति में निर्णय लेने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।सीनियर डीसीएम ने कहा बोगी पार्क एक रीयल टाइम ट्रेनिंग ज़ोन है, जहां प्रशिक्षु अब केवल पढ़ नहीं रहे, बल्कि तकनीक को जी भी रहे हैं।

इससे उनकी क्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे। पार्क में मौजूद पूरी तरह कार्यशील कपलिंग और अनकपलिंग मॉडल ट्रेन संचालन को वास्तविक रूप में समझने में मदद कर रहे हैं। प्रशिक्षु अब देख पा रहे हैं कि बोगियों को किस प्रकार जोड़ा और अलग किया जाता है। ट्रेनिंग प्रेशरयुक्त और लाइव सिस्टम पर आधारित होने के कारण क्लासरूम की सीमाएं टूट चुकी हैं।सीनियर डीसीएम ने कहा। ‘बोगी पार्क’ निश्चित रूप से भारतीय रेलवे के प्रशिक्षण ढांचे में एक क्रांतिकारी कदम है। यह लोको चालकों को सिर्फ ज्ञान ही नहीं देगा, बल्कि उनके निर्णय लेने की क्षमता और रिफ्लेक्सेस को भी सशक्त बनाएगा। इस नवाचार से ट्रेन संचालन की सुरक्षा, गुणवत्ता और समयबद्धता को भी नया बल मिलेगा।




