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एक्सप्रेस-वे की रफ्तार लौट आई है, लेकिन किसानों के खातों में मुआवजे की रफ्तार अब भी थमी हुई है

भारत माला परियोजना के तहत बन रहे बिलासपुर–उरगा फोरलेन एक्सप्रेस-वे को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आउटर ढेका क्षेत्र में अरपा नदी के पास मुआवजे और जमीन अधिग्रहण को लेकर पिछले लंबे समय से अटका निर्माण कार्य अब फिर से शुरू हो गया है। करीब 400 मीटर सड़क का लैंड डिस्प्यूट पूरी तरह सुलझने के बाद यह प्रगति संभव हो सकी है। सड़क के बीच खाली छोड़ा गया हिस्सा साफ नजर आ रहा है, जहां लंबे समय से काम ठप था। इसी हिस्से के कारण पूरी परियोजना अधूरी रह गई थी।

अब जमीन मालिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यहां निर्माण गतिविधियां दोबारा तेज कर दी गई हैं। करीब 1115 करोड़ रुपए की लागत से बन रही यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन भू-अर्जन और बटांकन से जुड़े विवाद के चलते यह छोटा सा हिस्सा पिछले डेढ़ साल से बड़ी बाधा बना हुआ था। मामला बढ़ने पर एनएचएआई ने आर्बिट्रेशन का सहारा लिया, जहां फैसला उसके पक्ष में आया।

इसके बाद अवॉर्ड जारी कर मुआवजा वितरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और कोरबा क्षेत्र के करीब पांच लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही रोजाना 10 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। हालांकि जमीनी हकीकत में निर्माण शुरू होने के बावजूद प्रभावित जमीन मालिकों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि आर्बिट्रेशन के बाद मुआवजा देने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक किसी के खाते में राशि नहीं पहुंची है। ऐसे में किसान जल्द से जल्द मुआवजे की रकम सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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