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एक करोड़ की लागत से बनी “हाइजेनिक फिश मार्केट” कई सालों से है बंद. मार्केट सड़क पर लग रही है; यातायात व्यवस्था बाधित।

तोरवा पॉवर हाउस चौक के पास साढ़े आठ साल पहले 1 करोड़ की लागत से बनाया गया हाईजेनिक फिश मार्केट पिछले कई साल से बंद पड़ा है। इसके चलते यहां सड़क पर ही मछली मार्केट लगता है और हर समय जाम लगता है। सबसे अधिक परेशानी शाम को होती है। मेयर के निर्देश के बाद भी यहां व्यवस्था नहीं सुधरी। अव्यवस्था के चलते मछली कारोबारी हाइजीनिक फिश मार्केट के भीतर नहीं जाना चाहते, उनकी मांग है कि उन्हें सड़क किनारे ही चौपाटी बनकर दिया जाए या वहां की व्यवस्था सुधारी जाए। तोरवा पावर हाउस चौक पर काफी समय से मछली और नॉनवेज बेचे जा रहे हैं। हालांकि पहले यहां सेलून से लेकर छोटी चाय की गुमटियां हुआ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे पूरा इलाका मछली, मुर्गा, मटन मार्केट में तब्दील हो गया। इससे यहां से गुजरने वाले उन लोगों को परेशानी होती है जो शाकाहारी है। साथ इस वजह से यहां बदबू भी उठती है और सड़क जाम की भी समस्या होती है, जिसे देखते हुए यहां सर्व सुविधायुक्त हाइजीनिक फिश मार्केट बनाया गया।

हाईजेनिक फिश मार्केट में 28 दुकानें हैं, जिसमें 18 थोक और बाकी चिल्हर व्यवसाय के लिए बनाई गई थी, लेकिन चिल्हर दुकानें आज भी सड़क किनारे लग रही हैं। यानी, सड़क ही मछली मार्केट बन गया है। इससे लोगों को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो रहा है, क्योंकि ट्रैफिक व्यवस्था पूरी पूरी तरह से ठप हो गई है. 8 साल बाद हाईजेनिक फिश मार्केट कबाड़ हो चुका है। जगह-जगह घास उग आए हैं। साथ ही यह शराबियों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। हाईजेनिक फिश मार्केट को देखरेख के लिए एक कर्मचारी भागीरथ राज है, जो कोटा में रहता है। वह महीने में एक-दो बार ही आता है। इसके अलावा एक चौकीदार रामकुमार यादव है। वह भी अक्सर गायब रहता है। मेन गेट की चाबी इसी के पास रहती है। मछली कारोबारी का कहना है कि वह कोई व्यवस्था नहीं है शुरुआती के 3 महीने हमने वहां व्यवसाय किया लेकिन कोई ग्राहक नहीं पहुंचा हमारा धंधा मंदा रहा, इसलिए मजबूरी में हमें वहा से छोड़कर सड़क के किनारे आना पड़ा है।

गौरतलब हैं कि हाइजेनिक फिश मार्केट का भाजपा शासन काल में लोकार्पण हुआ था, 8 साल पहले पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सुदर्शन भगत और प्रदेश के कृषि पशुपालन व मछली पालन मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल ने इसका लोकार्पण किया था। शहर में मांस व मटन का सेवन करने वालों को हाईजेनिक उत्पाद मिल सके।राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने तत्कालीन महापौर वाणीराव से हाईजेनिक फिश मार्केट के लिए अनुदान देने का प्रस्ताव रखा था। निगम प्रशासन ने पहले बृहस्पति बाजार के बगल में खाली जमीन या फिर दयालबंद मधुबन के पास इस मार्केट के निर्माण की मंजूरी दी, लेकिन जब जमीन नहीं मिली तो निगम ने बोर्ड को फंड लौटा दिया। इसके बाद मत्स्य विभाग के इस प्रस्ताव पर तोरवा पॉवर हाउस में हाईजेनिक फिश मार्केट बनाने मंजूरी दी। बोर्ड ने फंड को मत्स्य विभाग को ट्रांसफर कर दिया। इस राशि से तोरवा पॉवर हाउस चौक पर हाईजीनिक फिश मार्केट का निर्माण कराया गया। इस परिसर में थोक और चिल्हर दोनों दुकानें बनाई गई। इसके अलावा 12 मीट्रिक टन क्षमता वाला एक शीतगृह बनाया गया था। शुरुआत में मत्स्य विभाग ने यहां तोरवा पॉवर हाउस चौक और शनिचरी बाजार के मछली विक्रेताओं को बिठाकर कारोबार शुरू कराया लेकिन विभाग कारोबारियों को लाने में सफल नहीं हो सका।

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