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एक साथ अगस्त के महीने में 72 से अधिक ट्रेनों के रद्द होने से ट्रेनों में बढ़ी भीड़, यात्री संडास में बैठकर सफर करने को मजबूर।

एक साथ 72 से अधिक ट्रेनों के रद्द हो जाने के चलते एसईसीआर से शेष बचे ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं है। हमारे कैमरे में कैद तस्वीरो को आप खुद देख सकते हैं कि किस तरह से यात्री सीट के बजाय संडास के पास बैठकर सफर करने मजबूर है।

ट्रेनों के लेटलतीफी की समस्या से यात्री सालभर से जुझ रहे हैं। रेल प्रशासन हर बार एक ही जवाब देता है कि भारतीय रेलवे के अलग- अलग जोन में अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को पूरा किया जा रहा है। इसी कड़ी में रेलवे ने 72 से अधिक ट्रेनों को 19 अगस्त तक अलग- अलग तिथि में रद्द कर दिया है। जो ट्रेने चल रही है वो भी अपने निर्धारित समय से विलंब बिलासपुर स्टेशन पहुच रही है। इसके चलते उन ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लेकिन, यात्रियों को ट्रेन की सुविधा मिलने में तीन से पांच घंटे लग रहे है।

शनिवार को भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। शालीमार एलटीटी ट्रेन साढ़े सात घंटे विलंब से पहुंची। इसी तरह गुजरात जाने वाली हावड़ा- अहमदाबाद एक्सप्रेस एक घंटे और हावड़ा मुंबई मेल साढ़े चार घंटे,पोरबंदर एक्सप्रेस 5 घँटे, आजद हिन्द एक्सप्रेस 3 और समरसता एक्सप्रेस साढ़े 6 घँटे विलंब से बिलासपुर स्टेशन पहुँची। इन ट्रेनों के इंतजार में बैठे यात्रियों को स्टेशन में समय गुजारना पड़ा। कुछ यात्री परिवार के साथ थे। उनके साथ छोटे बच्चे भी थे। इन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। यात्रियों का कहना है कि अधोसंरचना कार्य जरुरी है। यह होना भी चाहिए। लेकिन, जो ट्रेनें चल रहीं है उन्हें समय पर चलाने के लिए रेलवे ठोस प्रयास करें।

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