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करवा चौथ: पत्नियों ने पति की दीर्घायु के लिए रखा निर्जला व्रत, पूजा के साथ सम्पन्न किया त्योहार

सनातनमें रिश्तों के लिए समर्पण और त्याग की अद्भुत परंपरा है। यहां पति की लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है। पहले यह व्रत केवल उत्तर भारत में प्रचलित था लेकिन टीवी सीरियल और फिल्मों ने इसे खूब प्रचारित किया। अब हर शहर में इसे पूरी निष्ठा के साथ मनाया जाता है। करवा चौथ को लेकर कई कहानियां प्रचलित है, जिसमें वीरवती नाम की राजकुमारी की कथा एक है। कहते हैं द्रौपदी ने भी करवा चौथ का व्रत किया था। करवा नाम की महिला की कथा भी प्रचलित है जिसके प्रताप से उसके पति के प्राण मगरमच्छ से बच पाए थे। करवा चौथ के व्रत से पति दीर्घायु हो या ना हो लेकिन एक दूसरे के प्रति समर्पण से आपसी प्रेम, विश्वास और समर्पण का भाव अवश्य बढ़ता है। कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले करवा चौथ व्रत पर विवाहित महिलाएं सास के हाथ से सुबह सरगी खाकर निर्जला व्रत आरंभ करती है।

बिलासपुर में भी महिलाएं काफी दिनों से इसकी तैयारी कर रही थी। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद दिनभर निर्जला व्रत किया। शाम को सोलह श्रृंगार कर महिलाएं पूजा के लिए एकत्रित हुई, जहां व्रत कथा सुनते हुए भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिक जी के साथ करवा माता और चंद्र देव की पूजा की गई। महिलाओं ने समूह में बैठकर थाली घूमाते हुए करवा गीत गाया। करवा चौथ व्रत का पालन सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा के साथ चंद्रोदय होने पर चंद्रमा की पूजा की परंपरा है। पौराणिक कथा के अनुसार यह व्रत चंद्र देव की पत्नी रोहिणी द्वारा रखा गया था, इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि करवा चौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र होता है ।पारंपरिक रूप से यह केवल महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला व्रत है, मगर कुछ स्थानों पर पुरुष अति समर्पण दर्शाने के लिए यह व्रत करते हैं, लेकिन यह विधान का उल्लंघन है।

बिलासपुर में अलग-अलग समाज द्वारा यह पर्व मनाया जाने लगा है लेकिन आज भी पंजाबी समाज में जैसा उत्साह नजर आता है वैसा कहीं और नहीं दिखता। इस वर्ष गजकेसरी योग, शश योग और बुध आदित्य योग के बीच करवा चौथ का व्रत मनाया गया। षोडशोपचार विधि से पूजा अर्चना की गई। तांबे या मिट्टी के पात्र में चावल , सुहाग सामग्री आदि रखकर सुहागिनों को भेंट की गई। दिनभर चंद्रोदय की प्रतीक्षा की गई । शाम को चंद्रोदय होते ही छन्नी की ओट से चंद्र दर्शन कर चंद्रमा और पति की आरती उतारी गई । फिर पति के हाथ से ही जल ग्रहण कर व्रत का पारन किया गया। इसके पश्चात पति-पत्नी ने साथ में भोजन ग्रहण किया। एक दूसरे को उपहार दिए गए। बिलासपुर में कई स्थानों पर करवा चौथ के सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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