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कांग्रेसियों ने तिफरा विद्युत कार्यालय का घेराव किया, बिजली बिल और सोलर योजना को लेकर विरोध जनता को बिजली बिल में राहत और सोलर सब्सिडी की मांग पर धरना प्रदर्शन जारी

बिलासपुर में तिफरा विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के बाहर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में धरना प्रदर्शन किया। गिने-चुने पुलिस बल होने के कारण कांग्रेसियों ने कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को खोलकर अंदर प्रवेश किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ अडानी कंपनी के खिलाफ भी विरोध जताया। जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस की सत्ता में लागू बिजली बिल हाफ योजना को बंद कर दिया, जबकि प्रदेश में बिजली सरप्लस होने के बावजूद आम जनता को महंगे दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।

शहर अध्यक्ष विजय पांडेय ने कहा कि भाजपा सरकार गूंगी-बहरी साबित हो रही है और चार सौ यूनिट तक की बिजली में 50% छूट की योजना पुनः लागू करनी चाहिए। उन्होंने सोलर ऊर्जा योजना में अडानी डीलर के माध्यम से महंगे उपकरण उपलब्ध कराने और सब्सिडी का फायदा केवल कुछ लोगों को मिलने का भी विरोध किया। कार्यपालक निदेशक आलोक कुमार अम्बष्ठ ने बताया कि बिजली बिल हाफ योजना अभी भी लागू है, लेकिन इसमें पहले चार सौ यूनिट तक का लाभ अब सौ यूनिट तक सीमित कर दिया गया है।

गरीब तबके के लगभग 15-20 लाख उपभोक्ता अभी भी योजना का लाभ ले रहे हैं।अधिकारियों ने सोलर रूफटॉप योजना की सफलता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 3 किलोवाट के प्लांट से मध्यम वर्गीय परिवारों के बिजली बिल लगभग जीरो हो सकते हैं। इस योजना में आकर्षक सब्सिडी और बैंक ईएमआई की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे निवेश 4-5 साल में वापसी हो जाती है और बाद में 25 साल तक लाभ मिलता तिफरा अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर में रिकॉर्डिंग में कोई अंतर नहीं है और अधिक बिल आने की शिकायतें तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि खपत के आधार पर होती हैं।

वहीं प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं।प्रदर्शन और अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी मांगों के समर्थन में धरना जारी रखे हैं, वहीं तिफरा अधिकारियों ने जनता को योजना और सोलर सब्सिडी की जानकारी देते हुए आश्वासन दिया है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बिजली बिल में राहत मिलेगी। ऐसे में अब दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना और योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करना प्रशासन की चुनौती बन गई है।

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