
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आज के दिन देव दिपावली भी कहा जाता है देवों की दिवाली साथ ही गुरुनानक जयंती पर्व भी मनाया जाता है।प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास और मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अन्त किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी तोरवा छठ घाट पर कार्तिक पूर्णिमा की सुबह ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है यहा श्रद्घालु सुबह अरपा नदी छठ घाट पहुंच नदी मे स्नान कर पूजा अर्चना कर नदी मे हजारो की संख्या मे दीप दान करते है। यह दृश्य अद्भुत दिखाई देता है,और अपने परिवार की सुख समृद्ध आशीर्वाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्राप्त करते है ।





