
छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित शासकीय विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और अनुशासनात्मक मामलों को लेकर एक अहम निर्देश सामने आया है। विषयांतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य में संचालित 15 शासकीय विश्वविद्यालयों के पृथक-पृथक अधिनियमों के अनुसार छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ही विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं और वे विश्वविद्यालय के अधिकारी भी माने जाते हैं।माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार अब यह आवश्यक किया गया है कि शासकीय विश्वविद्यालयों में कुलसचिव अथवा प्रभारी कुलसचिव की नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति या पदस्थापना से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर पूर्व में माननीय कुलाधिपति से आवश्यक अनुमोदन अथवा अनुमति प्राप्त की जाए। बिना कुलाधिपति की स्वीकृति के इस प्रकार के निर्णय नहीं लिए जाएंगे।इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध किसी भी प्रकार की जांच प्रक्रिया के बाद जब अंतिम निर्णय लिया जाना हो, उससे पूर्व भी माननीय कुलाधिपति से अनुमोदन या अनुमति लेना अनिवार्य होगा।इस निर्देश का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन में पारदर्शिता, संवैधानिक प्रक्रिया का पालन और निर्णयों में एकरूपता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन में जवाबदेही बढ़ेगी और किसी भी प्रकार के मनमाने निर्णय पर अंकुश लगेगा।




