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“गौठान” कागजी स्तर पर स्टार स्थिति, जबकि जमीनी स्तर पर बस लीपापोती।

सड़कों में घूमते गोधन से आए दिन यातायात जाम होता है और दुर्घटना में मवेशी घायल भी होते हैं। इसे देखते हुए पूर्व सरकार ने गौठान योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर गोठान का निर्माण कराया था, जोर-शोर से शुरू योजना कुछ समय बाद विरानी और बदहाली में तब्दील हो गई थी, जिसे लेकर भूपेश सरकार पर घोटाला का आरोप भी लगा था। जो अब कबाड़ में तब्दील नजर आ रहा है, ना यहां मवेशी है न चारा है और ना ही पानी है, इससे साफ दिखाई दे रहा है कि करोड़ों का घोटाला गोठान योजना में हुआ है।

ज़ी न्यूज़ की टीम ने शहर से लगे विभिन्न गौठानों का जायजा लिया तो पाया कि जिस सुविधा की बात तत्कालीन सरकार ने की थी वह कही नजर नही आ रही। ग्रामीणों का कहना है केवल योजना के प्रचार-प्रसार में ही पैसा खर्च हुआ है। मैदानी स्तर पर केवल लिपापोति किया गया हैं, आप खुद देखिए कहीं कोई मवेशी या सुविधा दिखाई नहीं दे रही है लोगों का कहना है कि वर्तमान सरकार ही इसका उद्धार कर सकती है। वही ग्रामीणों का आरोप है गोधन के प्रति नगर निगम लापरवाह बना हुआ है ।

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