
नदियों में अवैध रेत खनन का खेल संगठित तरीके से चल रहा है, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉला और अतिरिक्त इंजन पहले से तैयार रखे जाते हैं। तेज बहाव के बीच साफ रेत निकालने के लिए ट्रैक्टर सीधे नदी के भीतर उतार दिए जाते हैं, और फंसने की स्थिति में दो-तीन इंजन लगाकर बाहर खींच लिया जाता है। यह पूरा काम सुनियोजित ढंग से रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाता है।सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कुछ नेताओं के साथ शराब कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है। बताया जाता है कि जब विभागीय टीमें कार्रवाई कर वाहनों को जब्त करती हैं,तो प्रभावशाली लोगों के फोन अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं, जिससे कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है।हर रात लगभग सभी रेत घाटों पर माफिया के लोग तैनात रहते हैं। ट्रैक्टर ड्राइवर, मजदूर और अन्य कर्मचारी मुखबिरी का जिम्मा संभालते हैं ताकि छापेमारी की भनक पहले ही मिल जाए। इन्हें पैसे के साथ शराब की व्यवस्था भी की जाती है, जिससे वे पूरी रात घाट पर डटे रहते हैं और सुबह होते ही लौट जाते हैं।घुटकू घाट तक पहुंचना भी आसान नहीं है। रास्तों पर जानबूझकर रेत के ढेर लगाए गए हैं ताकि सामान्य वाहनों की आवाजाही रुक जाए और बाहरी लोगों की निगरानी आसान हो सके। यह व्यवस्था बताती है कि अवैध खनन केवल छिटपुट गतिविधि नहीं बल्कि मजबूत नेटवर्क के सहारे संचालित हो रहा है।




