रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों को हमेशा सतर्क रहने की हिदायत दी जाती है, लेकिन जब सुरक्षा की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर होती है, वही लापरवाही बरतें, तो अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला चांपा रेलवे स्टेशन पर सामने आया, जहां एक महिला यात्री का पर्स और मोबाइल ट्रेन में सफर के दौरान गुम हो गया, लेकिन जीआरपी ने मामले को गंभीरता से लेना तो दूर, प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की। जानकारी मिली कि शक्ति निवासी आरती मानिकपुरी रायगढ़-बिलासपुर लोकल ट्रेन में सफर कर रही थीं। जब ट्रेन चांपा रेलवे स्टेशन पहुंची, तो उन्होंने देखा कि उनका पर्स गायब हो गया। पर्स में एक रीयल मी 5 Pro मोबाइल, ATM कार्ड, दो सिम कार्ड और ₹2500 नकद थे। घबराई हुई महिला ने तत्काल जीआरपी थाना बिलासपुर में इसकी शिकायत दी, लेकिन यहां उसे न्याय की बजाय लापरवाही का सामना करना पड़ा।महिला यात्री जब जीआरपी थाना पहुंची, तो थाना प्रभारी गैरमौजूद थे। नतीजा, उसकी शिकायत तो लिख ली गई, लेकिन मामला पंजीबद्ध नहीं किया गया। यानी, औपचारिकता निभाने के नाम पर कागज लिया गया, पर कार्रवाई की कोई गारंटी नहीं दी गई। ट्रेनों में चोरी और यात्रियों की सुरक्षा का मामला कोई नया नहीं है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब पीड़ित खुद पुलिस के पास जाकर शिकायत कर रहा है, तब भी एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही है?

ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और जीआरपी की यह ढील अपराधियों के लिए खुले निमंत्रण से कम नहीं है। रेलवे यात्रियों से किराए और सुविधाओं के नाम पर पैसे तो वसूलता है, लेकिन जब सुरक्षा देने की बात आती है, तो जिम्मेदार विभाग नदारद नजर आते हैं। अगर पुलिस प्रशासन का यही रवैया रहा, तो यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे ही रह जाएगी। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन और जीआरपी इस मामले में कोई कार्रवाई करती है या फिर यह शिकायत सिर्फ एक और ‘फाइल’ बनकर दफ्तरों में धूल खाती रह जाएगी।




