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छत्तीसगढ़ को रेलवे कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी सौगात…

छत्तीसगढ़ को रेलवे कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। केंद्र सरकार ने खरसिया से नया रायपुर होते हुए परामलकसा तक 8,741 करोड़ रुपये की लागत वाली 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है।एसईसीआर के साथ अलग अलग मण्डलों में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ-साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, एसईसीआर जीएम तरुण प्रकाश और विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने इस मेगा प्रोजेक्ट का विस्तृत खाका पेश किया। यह परियोजना 278 किमी के रूट और 615 किमी ट्रैक लंबाई में फैली होगी।इसके तहत 21 स्टेशन, 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 रोड ओवर ब्रिज, 184 अंडरपास और 5 रेल फ्लाईओवर तैयार किए जाएंगे। इस रेल लाइन से राज्य की लॉजिस्टिक्स क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा और यह अब तक की सबसे बड़ी रेलवे परियोजना मानी जा रही है।रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि कोलकाता-मुंबई मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने और बिलासपुर-रायपुर जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को बायपास करने के लिए यह लाइन बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ मालगाड़ियों की गति और दक्षता बढ़ेगी, बल्कि शहरी क्षेत्रों में यात्री ट्रेनों के संचालन को भी सुगम बनाया जा सकेगा। जाम और प्रदूषण की समस्या में भी कमी आएगी।परियोजना का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों को मिलेगा। रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिले सीधे लाभान्वित होंगे। इस मार्ग से हर साल 21 से 38 मिलियन टन माल परिवहन किया जा सकेगा, साथ ही 8 मेल, एक्सप्रेस और सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें भी चलाई जाएंगी।पर्यावरण की दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा। इससे सालाना 113 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 4.5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। साथ ही 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी, जिससे ईंधन लागत और प्रदूषण दोनों में राहत मिलेगी।इस परियोजना से हर साल करीब 2,520 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत की बचत अनुमानित है। सड़क परिवहन की तुलना में यह रेल मार्ग अधिक किफायती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होगा। इससे प्रदेश की औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी और निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जीएम तरुण प्रकाश ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि इस परियोजना को पूरा करने में लगभग 4 से 5 साल का समय लगेगा। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आदिवासी और स्लम क्षेत्रों जैसे कांकेर, सरगुजा और अभनपुर-कांकेर रूट पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही, जिस पर रेल मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और भरोसा दिलाया कि डीपीआर मिलते ही आगे के प्रस्ताव प्रधानमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे। मोदी सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ को रेलवे बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी मिली है।जहां पहले राज्य को मात्र 311 करोड़ रुपये मिलते थे, अब 6,925 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। अब तक 1,125 किमी नई रेल लाइन बन चुकी है और 4,747 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। ऐसे में खरसिया से परामलकसा तक बनने वाली यह नई रेल लाइन सिर्फ कनेक्टिविटी का विस्तार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की औद्योगिक शक्ति, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और जनसुविधाओं को एक साथ रफ्तार देने वाला परिवर्तन साबित होगी।

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