
बिलासपुर :- हाईकोर्ट में मंगलवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। लखमा की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने गिरफ्तारी को अनुचित बताते हुए जमानत की मांग की।मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय ED और EOW दोनों कर रहे हैं।ED ने लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था, वहीं EOW ने भी केस दर्ज कर चार्जशीट पेश की है। आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच अवैध शराब कारोबार से हर महीने करीब दो करोड़ रुपये बतौर कमीशन लखमा तक पहुंचाए जाते थे।जांच एजेंसियों का कहना है कि शराब घोटाला तीन हिस्सों में चलता था कमीशन, कच्ची शराब की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी के लिए कार्टेल।इसमें IAS अधिकारी अनिल टूटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की भी बड़ी भूमिका सामने आई है। राज्य सरकार और EOW ने 27 गवाहों के बयान कोर्ट में पेश किए हैं, जिनसे घोटाले में लखमा की संलिप्तता का दावा किया गया है।




