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Thursday, April 2, 2026
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जनजातीय आस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर सर्व समाज का छत्तीसगढ़ बंद, निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा और तेज

बिलासपुर। सर्व समाज, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश में लगातार बढ़ रही सामाजिक अशांति और जनजातीय आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने बताया कि 24 दिसंबर को प्रदेशव्यापी छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया गया है। यह बंद पूर्णतः शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के विभिन्न सामाजिक, जनजातीय और नागरिक संगठनों की भागीदारी रहेगी। सर्व समाज का कहना है कि कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हाल ही में हुई घटना कोई पहली या एकमात्र घटना नहीं है। इसके पहले भी छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय बहुल इलाकों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। आरोप है कि कुछ संगठित तत्वों द्वारा जनजातीय आस्था को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे सामाजिक तनाव और वैमनस्य की स्थिति बन रही है। यह भी कहा गया कि आमाबेड़ा की घटना ने यह उजागर कर दिया है कि पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत संरक्षित जनजातीय क्षेत्रों में भी शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता, भीड़ आधारित हिंसा में उनकी भूमिका और पक्षपातपूर्ण कार्रवाईयों ने जनविश्वास को कमजोर किया है। सर्व समाज ने शासन-प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें राज्य में धर्म स्वतंत्रता विधेयक को प्रभावी और सख्ती से लागू करना, संगठित हिंसा में शामिल आरोपियों पर कठोर धाराओं के तहत त्वरित कार्रवाई, तथा कांकेर जिले में जनजातीय समाज पर हमलों के लिए जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ निष्पक्ष जांच शामिल है। इसके साथ ही संगठन ने मांग की है कि जनजातीय समाज के लोगों के साथ कथित पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने वाले पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। साथ ही शव दहन की प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्था और कथित भड़काऊ भूमिका निभाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और व्यक्तियों की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। अंत में सर्व समाज, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, जनजातीय आस्था, सामाजिक समरसता और कानून के शासन की रक्षा के लिए है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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