
हर साल की तरह इस वर्ष भी परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास की जयंती पूरे छत्तीसगढ़ में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। बिलासपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में रेलवे परिक्षेत्र स्थित तोरवा धाम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां सुबह से देर रात तक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बना रहा।तोरवा धाम में जयंती कार्यक्रम की शुरुआत जैतखंभ पर नए ध्वज के आरोहण के साथ हुई। चौका-आरती, गुरु महिमा का गुणगान और विधिवत पूजा-अर्चना ने पूरे परिसर को भक्ति से सराबोर कर दिया। इसके पश्चात भव्य भंडारे का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम ढलते ही पंथी गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भावनात्मक और उल्लासपूर्ण बना दिया।तोरवा धाम समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि रेलवे परिक्षेत्र में वर्ष 1984 से सतनामी रेल कर्मचारी सेवा समिति और करुणा माता महिला कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन लगातार किया जा रहा है।

यह परंपरा बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई थी, जिनके संस्कार और बाबा जी के संदेश आज भी इस धाम को जीवंत बनाए हुए हैं। यही कारण है कि हर वर्ष 18 दिसंबर को यह स्थान श्रद्धा के धाम के रूप में पहचाना जाता है।समिति सदस्यों के अनुसार यहां केवल बाबा गुरु घासीदास ही नहीं, बल्कि मिनीमाता जयंती, बालकदास जयंती सहित अन्य धार्मिक आयोजनों पर भी सपरिवार लोग एकत्रित होते हैं। बाबा जी का मनखे-मनखे एक समान का संदेश आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रहा है और यही आध्यात्मिक शक्ति तोरवा धाम की पहचान बन चुकी है।यह आयोजन हमारे बुजुर्गों की दी हुई परंपरा है, बाबा गुरु घासीदास और उनके संदेश के कारण आज भी लोग हर वर्ष पूरे श्रद्धा भाव से यहां जुटते हैं।यह सिर्फ जयंती नहीं, हमारी आस्था और एकता का पर्व है, जहां बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी मिलकर बाबा जी का आशीर्वाद लेते हैं।




