
छत्तीसगढ़ की सड़कों पर सफर अब और महंगा होने जा रहा है। 1 अप्रैल से लागू हो रही नई टोल दरों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है। खास बात यह है कि रिंग रोड पर प्राइवेट और हल्के कॉमर्शियल वाहनों को भले राहत दी गई हो, लेकिन भारी कॉमर्शियल वाहनों के टोल में 5 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी टोल प्लाजा पर कम से कम 5 रुपए की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है।NHAI ने कारों के सालाना पास की कीमत भी बढ़ाकर 3,075 रुपए कर दी है, जो पहले 3,000 रुपए थी। इस पास में 200 बार टोल पार करने की सीमा तय है, लेकिन बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को इसमें राहत नहीं बल्कि अतिरिक्त बोझ महसूस हो रहा है। आम यात्रियों का कहना है कि सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ, फिर भी हर साल टोल बढ़ाना उचित नहीं है।नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर कैश लेन-देन पूरी तरह बंद कर दिया गया है और फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया है। जिन वाहनों में फास्टैग सक्रिय नहीं होगा, उन्हें दोगुना टोल देना पड़ेगा। ऐसे में तकनीकी दिक्कतों या रिचार्ज की समस्या झेलने वाले यात्रियों के लिए यह नियम परेशानी का कारण बन सकता है।NHAI का कहना है कि सड़क रखरखाव और संचालन खर्च को देखते हुए यह वार्षिक वृद्धि जरूरी है, लेकिन स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में इस फैसले को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।हालांकि 20 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए छूट योजना जारी रखी गई है, फिर भी बढ़ती महंगाई के बीच टोल दरों में इजाफा आम जनता के लिए राहत नहीं बल्कि नई चिंता बन गया है।




