
बिलासपुर रेल मंडल में हुए हादसे ने एक परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। प्रकाश बर्मन पिछले चार दिनों से अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि हादसा रेलवे और ठेकेदार की लापरवाही से हुआ है। अपोलो अस्पताल में भर्ती प्रकाश बर्मन की हालत बेहद नाजुक है। परिजनों का कहना है कि कोचिंग डिपो में काम के दौरान लापरवाही के चलते वे ओएचई की चपेट में आ गए। हादसे के बाद ठेकेदार और रेलवे दोनों ने जिम्मेदारी से किनारा कर लिया।परिवार का आरोप है कि न तो सुरक्षा इंतज़ाम थे और न ही तत्काल मदद मिली। यहां तक कि अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी परिवार को ही उठानी पड़ी।

इसी गुस्से और दर्द के साथ परिजन और ग्रामीण मंगलवार को डीआरएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन में परिजनों ने इलाज का पूरा खर्च रेलवे और ठेकेदार से उठाने, मुआवज़ा देने और परिवार को नौकरी उपलब्ध कराने की मांग रखी। उनका कहना था कि अगर मांगे पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।रेलवे और ठेकेदार की लापरवाही से ये हादसा हुआ। अब इलाज और परिवार की जिम्मेदारी भी वही उठाएं। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। लेकिन प्रदर्शन के दौरान न तो रेलवे के अधिकारी सामने आए और न ही ठेकेदार। इससे परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। फिलहाल प्रकाश का इलाज अपोलो अस्पताल में जारी है। सवाल यही है कि क्या रेलवे और ठेकेदार जिम्मेदारी लेकर इस पीड़ित परिवार का सहारा बनेंगे, या फिर परिवार को अपनी लड़ाई और तेज करनी पड़ेगी।




