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तारबहार के घोड़ा दाना स्कूल जर्जर अवस्था में, तीन कमरों में संचालित प्राइमरी और मिडिल की कक्षाएं।

शिक्षकों ने कहा कि पार्षद और शिक्षा विभाग की मिली भगत के चलते इसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है।

शिक्षा सत्र बीत चुका है उसके बावजूद भी स्कूलों के लिए बनाए गए कमरे अब तक हैंड़ओवर नहीं हो सके हैं, जिससे टीचर और छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं तारबहार के घोड़ा दाना स्कूल का, यहां तीन कमरों में ही प्राइमरी, मिडिल स्कूल संचालित होता है ,अतिरिक्त कमरों की मांग शासन से की गई थी।

मांग के आधार पर स्कूल के सामने ही परिसर में चार कमरे बनाए गए है, हैंड ओवर के अभाव में नवनिर्मित कमरे भी जर्जर होने लगे हैं, और इसका लाभ स्कूल को भी नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने दबी जुबान से कहा कि पार्षद और शिक्षा विभाग की मिली भगत के चलते इसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है, जिस उद्देश्य से इसका निर्माण लाखों रुपए खर्च कर किया गया था वह पूरा नहीं हो रहा है। अब फिर से पुनर्निर्माण के नाम पर कमीशन खोरी का खेल खेला जाएगा। लगता है अगले सत्र से ही इसका फायदा छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को हैंडओवर के बाद मिल पाएगा।

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