
बिलासपुर में शनिवार शाम आई तेज आंधी ने बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी। करीब 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने कई इलाकों की बिजली आपूर्ति ठप कर दी। लेकिन जब लोग उम्मीद कर रहे थे कि बिजली विभाग के कर्मचारी हालात सुधारने में जुटे होंगे, तब नेहरू नगर स्थित सब स्टेशन की तस्वीर चौंकाने वाली निकली ऑफिस के अंदर गंदगी, बीड़ी-सिगरेट के रैपर, शराब की खाली बोतलें और नशे में धुत कर्मचारी।इस सब स्टेशन से पूरे इलाके की बिजली नियंत्रित होती है, लेकिन यहां बिजली से ज्यादा शराब की व्यवस्था दिखाई दी। महंगी विदेशी शराब की बोतलें से लेकर सस्ती देशी शराब की शीशियों तक ऑफिस के भीतर फैली थीं।

जब शहर के घरों में अंधेरा था, बच्चे रो रहे थे और बुज़ुर्ग परेशान, तब बिजली विभाग का यह दफ्तर जाम के दौर में डूबा था। जनता आक्रोशित है और इसे लापरवाही नहीं बल्कि अपराध मान रही है।इस पूरी लापरवाही के पीछे ठेकेदारी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अधिकतर कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं और ठेकेदार अपने खास लोगों को ही नियुक्त करता है, जिन पर कोई नियंत्रण नहीं होता। अधिकारी या तो चुप हैं या फिर मौन सहमति दे चुके हैं। सवाल ये है कि क्या जनता के टैक्स का पैसा कर्मचारियों के शौक पूरे करने में लगेगा? अगर जवाबदेही तय नहीं हुई तो अगली बार अंधेरा सिर्फ घरों में नहीं, लोगों के भरोसे में भी होगा।




