37.8 C
Bilāspur
Saturday, March 28, 2026
spot_img

धूमधाम से मनाई गई आंवला नवमी, आंवले के वृक्ष के नीचे पूजा और वन भोज का आयोजन

सनातन में प्रकृति पूजन का विशेष महत्व है। जीव जगत को जिन भी प्राकृतिक चीजों से लाभ मिलता है उनके प्रति कृतज्ञता जताई जाती है। ऐसा ही एक पर्व है आंवला नवमी, जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं । यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है । इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है ,क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। कहते हैं इस दिन आंवले के पेड़ की छांव में बैठना और उसके नीचे बैठकर भोजन करने से शुभता की प्राप्ति होती है, इस दिन सबसे पहला भोग भगवान विष्णु को लगाया जाता है और फिर पूरे परिवार के साथ आंवले के पेड़ के नीचे वन भोज की जाती है, जिससे श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि आंवला नवमी के दिन किए जाने वाले पुण्य कार्य का अक्षय फल प्राप्त होता है , इसलिए इसे अक्षय नवमी भी कहते हैं। यह व्रत करने से मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है।

आंवले के पेड़ की पूजा करने से सुख, संपत्ति और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही शिव जी का भी वास आंवले के पेड़ में होता है इसलिए उनका पूजन परम शुभकारी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार आंवले के पेड़ की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से हुई थी। जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया तो उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। इसके बाद राजा बलि को पाताल लोक भेज दिया राजा। बलि की पत्नी विंध्यावाली ने भगवान विष्णु से अपने पति की मुक्ति की प्रार्थना की तो उन्होंने वरदान दिया कि आंवले के पेड़ की पूजा से राजा बलि की मुक्ति होगी।

तब से इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। बिलासपुर में इस दिन हर उस उद्यान, पार्क आदि जगह लोग जुटे जहां आंवले के पेड़ मौजूद है। हर वर्ष की तरह इस बार सर्वाधिक भीड़ विवेकानंद उद्यान में नजर आयी। यहां महिलाओं ने हल्दी, चावल कुमकुम ,सिंदूर , नैवेद्य आदि अर्पित करते हुए आंवले के पेड़ की पूजा की। वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाया और फिर सात बार परिक्रमा करते हुए सुत बांधा। इसके पश्चात परिजनों ने वन भोज किया।यह अमृत फल आंवले की महिमा बताने का भी पर्व है।

आंवले में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और आयरन मौजूद है। शीतकाल में होने वाले सभी प्रकार से रोगों की मुक्ति आंवला सेवन से प्राप्त होती है। इस पूजन में भी आंवले का फल ग्रहण करने की परंपरा है। साथ ही पूरा परिवार जब एक साथ मिलकर वन भोज करता है तो उनमें आपसी प्रेम बढ़ता है। एक प्रकार से इस दिन से पिकनिक की शुरुआत होती है। बिलासपुर के अलग-अलग क्षेत्र में इस दिन बड़ी संख्या में महिलाएं घरों से विविध पकवान बनाकर कंपनी गार्डन पहुंची, जहां आंवले के पेड़ की पूजा अर्चना के बाद सभी ने मिलकर वन भोज किया ।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

132,000FansLike
3,912FollowersFollow
21,600SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles