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धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन का पर्व, भद्रा के कारण दोपहर बाद बहनों ने बांधी राखियां।

भाई बहन के प्रेम के प्रतीक का पर्व रक्षाबंधन पूरे देश में प्रेमभाव से मनाया गया। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहा। ऐसी मान्यता है जब भी भद्रा होती है तो इस दौरान राखी बांधना शुभ नहीं होता है। राखी भद्राकाल के बीत जाने के बाद ही मनाई गई। 1:15 के बाद भाइयों की कलाइयां सजनी शुरू हुई, बहनों ने भाइयों को आशीर्वाद देकर रक्षा का वचन लिया, तो वही भाइयों ने भी उन्हें रक्षा का संकल्प दिया और उपहार भी दिए।

भाई बहनों के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम और प्रेम भाव के साथ मनाया गया, इस दौरान बहनो ने भाइयो के माथे पर तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और उनसे रक्षा का संकल्प भी लिया, वही कुछ बहनो ने लड्डू गोपाल के हाथों पर रक्षा सूत्र बांधा क्योंकि जिनके भाई नहीं पहुंच पाते या नही होते भाइ के प्रतीक के रूप में लड्डू गोपाल को राखी बांधकर उनसे आशीर्वाद लेती है, बहनों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार होता है। भाइयों से रुपए उपहार मिलने का दिन होता है वही बहनों का कहना है कि भाई स्वस्थ और खुश रहे यही हमारी कामना है और यही हमारे लिए उपहार है।

हिंदू सनातन धर्म में भी रक्षाबंधन का विशेष महत्व है, इसे लेकर कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई है जिसमें भगवान कृष्ण और बहन सुभद्रा की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है, इस दिन भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं, माथे पर तिलक सजाकर उनकी आरती उतारी जाती है, और हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर मुंह मीठा कराया गया। भाई बहन का यह पर्व भारतीय संस्कृति का भी महत्वपूर्ण अंग है, इस दिन भाई सभी काम छोड़कर अपनी बहनों के पास राखी बनवाने पहुंचते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प भी लेते हैं साथ ही बहनों को रुपए गिफ्ट उपहार देकर अपना आशीष देते हैं।

सावन का अंतिम सोमवार रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया गया, इससे उत्साह और दोगुना हो गया। इस बार भद्रा का भी इस पर साया रहा, सवा एक बजे भद्रा काल के समाप्त होते ही बहनों ने भाइयो की कलाई पर राखी बांध कर बहनों के प्रति अपना प्रेम प्रगट किया।

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