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नगर निगम की कार्रवाई महज दिखावा,अतिक्रमणकारी बेखौफ…

शहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने के दावे करने वाला नगर निगम खुद अब सवालों के घेरे में है। कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमण दोबारा लौट आता है और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। शनिचरी बाजार से लेकर तेलीपारा तक की तस्वीरें नगर निगम की नाकामी बयां कर रही हैं। नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम ने कमिश्नर के निर्देश पर शनिचरी बाजार और मंगला क्षेत्र में सड़कों पर अतिक्रमण कर बैठे दुकानदारों और ठेलेवालों पर जेसीबी चलवा दी। सामान जब्त किए गए, दुकानें हटाई गईं, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ चंद घंटों के लिए असरदार साबित हुई।नगर निगम की कथित सख्ती के बाद भी अतिक्रमणकारी इतने बेखौफ हैं कि कुछ ही घंटों में वापस वहीं कब्जा जमा लेते हैं। तेलीपारा में जैन लस्सी दुकान इसका ताजा उदाहरण है। निगम ने हाल ही में इस पर कार्रवाई कर सामान जब्त किया था, लेकिन अब फिर से दुकान सड़क पर सज गई है।निगम की नाकामी यहीं खत्म नहीं होती। जिस सड़क पर दोबारा दुकान लग गई है, वहां राहगीरों को चलना मुश्किल हो गया है। ग्राहक अपने वाहन बीच सड़क पर खड़े कर देते हैं, जिससे जाम और अव्यवस्था फैल रही है। नगर निगम इस स्थिति से पूरी तरह अनजान या फिर लापरवाह नजर आ रहा है।जब अतिक्रमण शाखा अधिकारी प्रमीला शर्मा से दोबारा कब्जा जमाने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कमिश्नर की अनुमति का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि आदेश के बिना वो कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं।प्रश्न ये उठता है कि क्या हर बार कार्रवाई के लिए कमिश्नर की अनुमति जरूरी है? क्या निगम अधिकारी सिर्फ जेसीबी चलवाकर फोटो खिंचवाने और प्रेस रिलीज़ देने के लिए काम कर रहे हैं।मॉनिटरिंग और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। बार-बार की गई कार्रवाई के बावजूद अगर अतिक्रमण दोबारा लौटता है, तो यह निगम की नाकामी ही नहीं, बल्कि मिलीभगत की भी आंशका पैदा करता है। लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या अतिक्रमण हटाना अब सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है।शहर के लोगों को राहत तब ही मिलेगी जब निगम सिर्फ दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि सख्त और निरंतर निगरानी वाली नीति अपनाएगा।वरना कब्जाधारी यूं ही सड़क पर राज करेंगे और आम जनता परेशान होती रहेगी।

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