बिलासपुर रेलवे स्टेशन में भीड़ का आलम यह है कि यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए खुद की जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गोंदिया से झारसुगड़ा जाने वाली पैसेंजर लोकल ट्रेन में पैर रखने की भी जगह नहीं बची है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे गेट के पास खड़े होकर अपनी यात्रा करने को मजबूर हैं।लोकल ट्रेन में जगह ना होने की वजह से यात्रियों को धक्का-मुक्की खाकर ट्रेन में चढ़ना पड़ रहा है।

रेलवे के अधिकारी इस स्थिति से अनजान बने बैठे हैं, जबकि यात्रियों की भीड़ हर दिन बढ़ती जा रही है।वर्तमान में चल रहे नवरात्र पर्व के दौरान अलग अलग आसपास के धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए जाने वाले यात्री बड़ी संख्या में स्टेशन पहुंच रहे हैं।लेकिन उन्हें अपने गंतव्य तक जाने के लिए भारी समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से विलम्ब से चल रही हैं।इससे भी यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे की विज्ञप्तियों में भले ही स्पेशल ट्रेनों और अतिरिक्त ठहराव की बातें कही जा रही हों, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अलग अलग धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए जाने वाले दर्शनार्थियों को अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे के उच्च अधिकारी स्थिति से पूरी तरह अनजान हैं। जब तक कोई हादसा नहीं हो जाता, तब तक रेलवे के अधिकारियों की नींद भी नहीं खुलती।यह हाल सिर्फ एक ट्रेन का नहीं, बल्कि हर लोकल ट्रेन का है, जो इस दौरान धार्मिक स्थलों की ओर जा रही है।

रेलवे की अव्यवस्था और अनदेखी से यात्री खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि रेलवे के अधिकारी कब इस स्थिति पर ध्यान देंगे और श्रद्धालुओं की इस मुसीबत का हल निकालेंगे। फिलहाल, रेलवे की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा और श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा पूरी कर पाएंगे।





