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निगम प्रशासन की ऐसी लापरवाही कि सफाई करने वाली डेढ़ करोड़ की मशीन भी कबाड़ में तब्दील होती जा रही।

सरोवर धरोहर योजना के तहत तालाबों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखने चलाई जा रही योजना निगम प्रशासन की लापरवाही से पूरी नहीं हो पा रही है। एक करोड़ 56 लाख रुपए मासिक किराए पर तालाब की सफाई के लिए मशीन किराए पर मंगाई गई हैं, पुणे की कंपनी से आई यह मशीन सफाई तो नहीं कर पाई बल्कि कबाड़ में तब्दील होती जा रही है, शहर के तालाबों में जलकुंभी का साम्राज्य हैं, जलस्रोतो की सफाई के लिए मशीन मंगाई गई सफाई तो नहीं कर पा रही बल्कि शासन का पैसा पानी में जरूर बह रहा हैं।

जलकुंभी साफ नहीं होने से मोहल्ले वासी गंदगी, बदबू और मच्छर से हलाकान हैं, उनका कहना है कि मशीन केवल शोभा बनकर रह गई है। महीनो हो गए तालाब की सफाई नहीं हुई है, केवल शासन का पैसा ही बर्बाद हो रहा है। लोगों का कहना यह भी है कि इतने पैसों में तो नई मशीन खरीदी जा सकती थी फिर किसे लाभ पहुंचाने के लिए इसे किराए पर ली गई है यह समझा जा सकता हैं। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई होनी चाहिए ताकि तालाब की सुंदरता के साथ संरक्षण भी हो सके और लोगों को मच्छर गंदगी से राहत मिल सके।

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