
शनिवार 13 दिसंबर को पूरे देश के साथ बिलासपुर में भी वर्ष की अंतिम नेशनल लोक अदालत का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। माननीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के मार्गदर्शन और पूर्व तैयारी के चलते लोक अदालत में सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। बड़ी संख्या में पक्षकार अपने लंबित मामलों के निराकरण के लिए न्यायालय पहुंचे। नेशनल लोक अदालत का मूल उद्देश्य न किसी की जीत, न किसी की हार के सिद्धांत पर आधारित है, जहां आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया जाता है। इस लोक अदालत में श्रम विवाद, वैवाहिक मामले, बीमा प्रकरण, मोटर यान दुर्घटना से जुड़े केस सहित अन्य छोटे–बड़े विवादों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण निराकरण किया गया, जिससे पक्षकार संतुष्ट नजर आए।लोक अदालत में पहली बार न्यायालय आने वाले लोगों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी लगाए गए थे। यहां पक्षकारों को मार्गदर्शन दिया गया ताकि वे भटकें नहीं और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। आवश्यक जानकारी देकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया गया, जिससे वे संतुष्ट होकर लौटते दिखे।नेशनल लोक अदालत में इस बार सबसे अधिक मामले ऑनलाइन चालानों से जुड़े सामने आए। नागरिकों ने बताया कि आईटीएमएस और यातायात विभाग दोनों की ओर से ई-चालान भेजे जा रहे हैं, जिनकी जानकारी और प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है।

कई मामलों में तय समय सीमा के बाद चालान सीधे कोर्ट में पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। लोक अदालत में बताया गया कि ई-चालान में सात दिन और फिर तीन माह की निर्धारित प्रक्रिया होती है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग समय पर जवाब नहीं दे पाते। कई चालान अधूरे भी पाए गए, जिनके निराकरण के लिए ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ विभाग के समन्वय से समाधान की आवश्यकता बताई गई। लोक अदालत में ऐसे मामलों का मार्गदर्शन कर लोगों को राहत दी गई।इसके साथ ही बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के बाद अचानक अधिक राशि के बिल आने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के उपभोक्ताओं ने कहा कि बिना स्पष्ट कारण अत्यधिक बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। लोगों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। नेशनल लोक अदालत में पहुंचे नागरिकों ने शासन–प्रशासन से मांग की कि ऑनलाइन चालान और बिजली बिलिंग प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। जनता ने कहा कि पहले सड़क, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाएं सुधारी जाएं, इसके बाद ही चालान की कार्रवाई हो। लोक अदालत में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने छोटे–छोटे विवादों का समाधान कराया और संतोष के साथ न्यायालय परिसर से लौटे।




