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पब्लिक ट्रांसफार्ट के लिए बिलासपुर में उपलब्ध सीटी बस की हालत खराब, 40 में से मात्र 17 बसे ही सड़क में चलने योग्य, बाकी कबाड़ में तब्दील।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में नागरिकों को सिटी बसों की सुविधा केंद्र सरकार के अनुदान से साल 2016 में बिलासपुर में उपलब्ध कराई गई। 25 करोड़ की लागत से सर्वसुविधायुक्त 40 नई सिटी बसें केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। संचालन में लापरवाही के चलते अधिकांश बसें कबाड़ हो चुकी हैं।

अफसरों की लापरवाही से ठेकेदार सिटी बसों का मनमाने तरीके संचालन कर रहे है। परमिट में दर्शाए समय के अनुसार सिटी बसें नहीं चल रही हैं। सिटी बसें हर स्टाप पर लेट से पहुंचती हैं।कोरोनाकाल में सिटी बसें बंद रहीं। इसके तीन साल बाद 13 जनवरी 2023 से 15 सिटी बसों का संचालन शुरू किया गया। इस बार सन मेगा वेंचर को ठेका दिया गया। बसों की संख्या बढ़ाकर 40 की गई है जिसमें से 17 बसे ही सड़को पर दौड़ रही हैं। बाकी बसे कबाड़ में तब्दील हो गई हैं। आम नागरिकों का कहना है कि बस सेवा बदहाल हो गई है जबकि यह जनता के लिए एक अच्छी योजना थी।

ठेकेदार की लापरवाही से आमजन सिटी बस की सुविधा से वंचित है। वहीं 23 सिटी बसें कबाड़ हो चुकी हैं। अनुबंध के मुताबिक सभी बसों की रिपेयरिंग कर उसे संचालित किया जाना था, लेकिन ठेकेदार अब तक इन बसों को सुधरवा नहीं पाया है। शासन ने ठेकेदार को रिपेयरिंग की राशि भी देने का प्रावधान किया है। इसके बावजूद उसके द्वारा रुचि नहीं ली जा रही है। निगम के अधिकारी सिटी बसों के संचालन, बसों के रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे सिटी बस की व्यवस्था दिनों दिन बदतर हो रही है।

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