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पर्यावरण संरक्षण में भारतीय रेलवे की बड़ी पहल, हरियाली से बना ऑक्सीजन ज़ोन…

भारतीय रेलवे न केवल ट्रेनों और मालगाड़ियों का सुरक्षित संचालन कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। रेलवे क्षेत्रों में फैली हरियाली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बिलासपुर रेलवे परिक्षेत्र में घने वृक्षों और ऑक्सीजन ज़ोन के विस्तार ने इसे शहर की तुलना में अधिक ठंडा और प्रदूषण मुक्त बना दिया है। यही वजह है कि रेलवे परिसर आज हरियाली और स्वच्छ हवा के लिए जाना जाता है। देखें हमारी खास रिपोर्ट। रेलवे स्टेशन, तारबाहर चौक, हेमू नगर या किसी भी रेलवे क्षेत्र में कदम रखते ही हरियाली की ताजगी का एहसास होता है। रेलवे ने पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया है, जिससे यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भर गया है।रेलवे प्रशासन ने न केवल नए पौधे लगाए, बल्कि वर्षों पुराने पेड़ों को भी संजोकर रखा है। यही वजह है कि रेलवे परिक्षेत्र का तापमान शहर की तुलना में 2 से 3 डिग्री कम रहता है। यह क्षेत्र 140 एकड़ में फैला है, जिसमें रेलवे के विभिन्न कार्यालय, कॉलोनियां और अधिकारी बंगले शामिल हैं।रेलवे की हरियाली को संरक्षित रखने के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं। यदि किसी निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों की कटाई हुई, तो नए पौधे लगाकर इसकी भरपाई की गई। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ संतोष कुमार ने बताया कि रेलवे पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है और रेलवे क्षेत्र में लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है।रेलवे क्षेत्र की हरियाली और स्वच्छ वातावरण की वजह से यह इलाका मॉर्निंग वॉक करने वालों के लिए सबसे पसंदीदा स्थान बन गया है। यहां हर सुबह रेलवे कर्मचारी, अधिकारी और स्थानीय लोग सेहतमंद माहौल में सैर करने आते हैं। रेलवे परिसर की हरियाली और स्वच्छ हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है।भारतीय रेलवे की यह हरित पहल ना सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है,बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बन चुकी है।रेलवे प्रशासन की इस पहल से अन्य संस्थानों को भी प्रेरणा मिल रही है। उम्मीद है कि आने वाले समय में अन्य सरकारी और निजी संस्थान भी अपने परिसरों में हरियाली को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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