
लिंगियाडीह क्षेत्र में झुकी झोपड़ियों को हटाए जाने के विरोध में पिछले एक महीने से चल रहा महिलाओं का आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। लगातार जारी धरना-प्रदर्शन का असर सोमवार को उस समय और स्पष्ट दिखाई दिया, जब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं आंदोलनरत महिलाओं के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचे।धरना स्थल पर पहुंचते ही भूपेश बघेल ने महिलाओं से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर गरीब और कमजोर वर्गों को उनके घरों से बेदखल कर रही है, जबकि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के बड़े विकास कार्य की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “घर उजाड़कर विकास नहीं किया जा सकता।”पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए किसी को उजाड़ने की नीति नहीं अपनाई। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने गरीबों को सुविधाएं देने और उन्हें उनके स्थान पर सुरक्षित रखने के लिए कई योजनाओं पर रोक और संशोधन किए थे।

इस दौरान भूपेश बघेल ने लिंगियाडीह के बेसन आंदोलन से लेकर वर्तमान संघर्ष तक के सफर को भी याद किया और कहा कि यह क्षेत्र हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ा रहा है। उन्होंने आंदोलनरत महिलाओं को भरोसा दिलाया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ हैं और जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाया जाएगा।महिलाओं ने भी सरकार से झोपड़ियां न हटाने और स्थायी समाधान की मांग दोहराई।




