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पूर्व विधायक शैलेष पांडे को 20 लाख की फिरौती और परिवार को अगवा करने की धमकी,एसएसपी से लेकर राज्यपाल तक पहुँचा मामला, कांग्रेस ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

बिलासपुर में पूर्व विधायक शैलेष पांडे और उनके परिवार को मिली फिरौती और अपहरण की धमकी ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अज्ञात कॉलर ने 20 लाख रुपये की मांग करते हुए उनकी रिश्तेदार की बेटी को अगवा करने की धमकी दी है। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और कांग्रेस खुलकर सामने आ गई है। यह पूरी घटना 25 जून दोपहर की है, जब पूर्व विधायक शैलेष पांडे और उनकी पत्नी रितु पांडे के मोबाइल पर एक कॉल आया।कॉल करने वाले ने पहले अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया, फिर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी। यही नहीं, उसने सहकारिता उपपंजीयक मंजू पांडे की बेटी को अगवा करने की धमकी भी दी।इस गंभीर धमकी के बाद शैलेष पांडे ने तत्काल सकरी थाना जाकर शिकायत दर्ज कराई।

वहीं अगले ही दिन वे स्वयं परिवार संग एसपी कार्यालय पहुंचे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मिलकर इस मामले में त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की। इस मामले के सामने आते ही कांग्रेस नेताओं में नाराजगी और चिंता दोनों दिखी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय पांडे, ग्रामीण अध्यक्ष विजय केसरवानी, पूर्व विधायक रश्मि सिंह, नेता प्रतिपक्ष भारत कश्यप समेत कई कांग्रेस पार्षद एसपी कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में उन्होंने पूर्व विधायक, उनके परिवार और मंजू पांडे के परिजनों को सुरक्षा देने की मांग की। साथ ही सवाल उठाया कि जब एक जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की प्रति राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी को भी भेजी है। नेताओं का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे राज्य स्तर पर आंदोलन करेंगे।

यह केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्था की साख का सवाल है।इधर पुलिस ने धमकी भरे कॉल की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल्स, लोकेशन और नंबर खंगाले जा रहे हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा है कि मामला संवेदनशील है और अपराधियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। परिवार को फुलप्रूफ सुरक्षा दी जाएगी। फिलहाल यह मामला सिर्फ एक पूर्व विधायक या उनके परिवार की धमकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल है। जब सार्वजनिक जीवन जीने वाले जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।फिलहाल देखना होगा कि पुलिस इस मामले को किस तरह सुलझाती है।

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