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प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने जिस स्कूल में ली थी प्राथमिक शिक्षा, वहां की दीवार धंसी, बाल बाल बचे बालक।

मुंगेली के शंकरवार्ड स्थित रामानुज प्रसाद देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला भवन की हालात बहुत जर्जर है। बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। दर्जनों बार उच्चाधिकारियों को शिकायत के बाद भी उनके कान में जूं तक नही रेंग रही।

प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बेहतर करने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की बात कही जाती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. यह नजारे हैं मुंगेली स्थित शासकीय रामानुज प्रसाद देवांगन विद्यालय की, जहां की स्थिति सोचने पे विवश करती है। स्कूल लगने की तैयारी की जा रही थी। बच्चों के बैठने के लिए टाटपट्टी बिछाया जा रहा था इसी दौरान स्कूल के एक कमरे का लगभग चौथाई हिस्से का फ्लोर दबकर 2- 3 फिट नीचे चला गया। गनीमत है किसी को चोट नही लगी; कोई हताहत नही हुआ। बच्चे और उनके पालक घबराएं हुए थे। अधिकांश पालक ने अपने बच्चों को वापस घर ले गए। पालको के मन मे भय है कि स्कूल भवन की हालात को देखकर कभी भी कुछ भी हो सकता है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव इस स्कूल से पढ़े हुए हैं लेकिन ऊंचे पदों में पहुँच जाने के बाद पीछे मुड़कर कोई नही देखता। आज उनके गृह शहर में निर्माण की क्या हालत हैं इसी बात से पता लगाया जा सकता है।

शासकीय तंत्र में भ्रष्टाचार बहुत अंदर तक व्याप्त है। किसी भी निर्माण एजेंसी द्वारा बनाया गया भवन, पुल, पुलिया, सड़क, नाली कुछ ही दिनों में निर्माण की गुणवत्ता बताने लगता है। भवन में दरार पड़ जाते हैं, पुल गिरने लगता है, नाली टूट जाती है और सड़क उखड़ने लगता है। यही हाल मुंगेली के परमहंस वार्ड स्थित रामानुज देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला का है। शहर के एक दानदाता ने जमीन और पैसे देकर शहर के नौनिहालों के भविष्य संवारने का काम किया था लेकिन शासकीय तंत्र में बैठे भ्रष्ट लोगों के कारण आज बड़ी दुर्घटना होते होते टल गयी। ऐसे ठेकेदारों और इंजीनियर के ऊपर कार्यवाही नही होने के कारण आज देश मे रोज सैकड़ों लोग जान गवां रहे हैं।

स्कूल के प्रधान पाठक सुजीता पाटले ने बताया कि उनके द्वारा विभाग के उच्चाधिकारियों को स्कूल की स्थिति से कई बार लिखित में अवगत कराया गया है। विभाग के अधिकारी स्कूल भ्रमण में आते हैं और देखकर बच्चों को उनके भाग्य के भरोसे छोड़कर चले जाते हैं। कभी कोई कार्यवाही नही हुई। ऊपर के कमरों की फ्लोर टूटने और सीलिंग टूटकर बारबार गिरने के कारण स्कूल संचालन अब अतिरिक्त कमरों में किया जाने लगा है। अब हालात ये है कि स्कूल के नीचे के कमरों की फ्लोर दबने लगी है ऐसे में बच्चे कहाँ पढ़े।

विडंबना ही है कि जिस स्कूल से पढ़कर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री निकले हैं, आज उसकी स्थिति जर्जर है और उसका जीर्णोद्धार तक नहीं हो पा रहा। अब देखना होगा कि इन नौनिहलों के पढ़ाई के लिए शासन प्रशासन क्या व्यवस्था बनाती है।

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