
बिलासपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कभी मॉडल स्कूल के रूप में पहचान बनाने वाले स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल अब खुद संकट से जूझते नजर आ रहे हैं। जिले के चार आत्मानंद स्कूलों में संचालित नर्सरी केजी और एलकेजी कक्षाओं को बंद किए जाने के फैसले से करीब 300 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। डीएमएफ फंड नहीं मिलने को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। नर्सरी कक्षाएं बंद किए जाने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में पालक कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी चिंता जाहिर की पालकों का कहना है कि लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से उनके बच्चों का चयन हुआ था और शिक्षा सत्र के बीच अचानक कक्षाएं बंद करना पूरी तरह अनुचित है। इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी बल्कि आगे के एडमिशन को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार बिलासपुर के तिलक नगर, लाल बहादुर शास्त्री, तारबाहर और लाला लाजपत राय स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। इन स्कूलों में नर्सरी के लिए केवल छह शिक्षिकाएं पदस्थ हैं जिनके वेतन भुगतान के लिए डीएमएफ से फंड नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण प्रशासन ने नर्सरी कक्षाएं बंद करने का आदेश जारी किया है स्वामी आत्मानंद स्कूलों की स्थापना गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। पालकों की मांग पर नर्सरी कक्षाएं शुरू की गई थीं लेकिन अब इन्हीं वर्गों के अभिभावक सबसे अधिक परेशान हैं

क्योंकि अधिकांश परिवार निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में सक्षम नहीं हैं।प्रशासन के अनुसार 8 फरवरी से नर्सरी कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी। इस सत्र में अस्थायी रूप से सरकारी प्राथमिक स्कूलों की शिक्षिकाओं के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की गई है जबकि आगामी सत्र से नर्सरी कक्षाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है और वर्तमान सत्र तक पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। हालांकि अब सवाल यह है कि क्या फंड की कमी के कारण मासूम बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ना उचित है इसका जवाब शासन और प्रशासन को देना होगा।




