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*बर्बर गैंगरेप पीड़िता से GSS प्रमुख ने भेंट-चर्चा किया और न्याय पाने संग-साथ देने का निश्चय किया।*

बर्बर गैंगरेप पीड़िता से GSS प्रमुख ने भेंट-चर्चा किया और न्याय पाने संग-साथ देने का निश्चय किया।

गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) प्रमुख लखन सुबोध ने अपने ब्यस्ततम कार्यक्रम एवं अस्वस्थ अवस्था में आवश्यक समय निकालकर, पिछले चार-पांच दिनों पूर्व बिलासपुर नगर से सटे ब्लॉक के एक गांव में हुए दलित (सतनामी समुदाय) महिला के साथ भेंटकर बर्बर गैंगरेप की जानकारी लिया।
मिली जानकारी के अनुसार यह घटना सामंती सोच-संस्कार से ग्रस्त नराधमों की निरीह महिला के साथ गैंगरेप कर बदला लेने की घटना है।
पीड़िता के पुत्र का और एक गैर सतनामी नाबालिग युवती के बीच कथित संबंध से उपजे, करीब डेढ़ दो साल पूर्व की घटनाक्रम का बदला, महिला से गैंगरेप कर लिया गया।
GSS मानता है कि, कोई भी अपराध करता है, तो उसकी सजा कानून-अदालत देगा। यदि महिला के पुत्र ने कोई अपराध किया है, तो उसे कानून कड़ी से कड़ी सजा दे। ज्ञात हुआ है कि, महिला के आरोपी पुत्र डेढ़ वर्ष से जेल में बंद है और यह ठीक भी है। लेकिन उस अपराध का बदला किसी निरपराध-असहाय महिला पर गैंगरेप करने वाले को और भी कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
इस मामले में यह भी जानकारी मिली है कि, अब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। और मामले को सत्तारूढ़ राजनैतिक प्रभाव से मामूली छेड़छाड़ की घटना बताने का असफल प्रयास किया जा रहा है।
सुबोध ने यह भी नोट किया कि, रात 12:00 की गैंगरेप से पीड़िता की गुहार एवं नराधमों की बदला लेने में प्रयुक्त गालियों- वीभत्स उदगार को कोई सुनकर बचाने क्यों नहीं आया?
इस पर मालूम हुआ कि, उस रात रामायण गान के लाउडस्पीकर का कानफोड़ आवाज वातावरण को “राममय” बनाया हुआ था। ऐसे में पीड़िता की आवाज को कोई नहीं सुन सका।
यदि कोई सुना हो, तो उन्हें लगा होगा कि, “रामनाम में कुकुर कटायन” जैसे मुहावरा को चरितार्थ होते देखा-सुना होगा और लौकिक बातों को मायाजाल समझ-झटककर अलौकिकता में रम गया होगा।
लोगों ने यह अंदेशा व्यक्त किया कि, डेढ़ साल पूर्व हुई कथित घटना का बदला आज क्यों लिया जा रहा है। इस पर यह मालूम हुआ कि, अब जब प्रदेश में जिस नीति-नीयत के पार्टी की सरकार है, उसमें यह दरिंदगी करने वाले अपराधियों को बचाना ज्यादा संभव है।
यही कारण है कि, रेप के अपराध की धाराओं में जब यह स्पष्ट प्रावधान है कि, पीड़ित महिला के नामजदगी बयान ही, अपराधियों को पकड़ने के लिए पर्याप्त सबूत माना जाता है और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाती है,उसके बाद सारा प्रमाण संकलन करने का कार्य पुलिस करता है।
लेकिन पुलिस सिर्फ “कर रहे हैं” का तमाशा लोगों को दिखा रहा है। अपराधी बेखौफ अट्टहास लगा रहे हैं और पीड़िता डर-भय की आशंका से पल-पल मर रही है।
GSS ने तय किया है कि, इस मामले पर न्याय के लिए जन आंदोलन संगठित करेगा और सभी न्यायप्रिय लोगों, सामाजिक राजनैतिक व्यक्तियों-संगठनों को एकजुट करेगा।
पीड़िता से भेंट-चर्चा में GSS की *विधिक सलाहकार

            *अजय अनंत*
      (GSS ऑफिस सचिव)
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