
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हो रहे अत्याचार, हिंसा और हत्याओं के विरोध में सोमवार 9 फरवरी को बिलासपुर में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतरा। मानवता और भाईचारे के संदेश के साथ निकाले गए इस शांतिपूर्ण जुलूस के जरिए केंद्र सरकार से कड़ा फैसला लेने की मांग की गई। सोमवार को मुस्लिम समुदाय की ओर से नेहरू चौक से कलेक्टर कार्यालय, बिलासपुर तक शांतिपूर्ण जुलूस निकाला गया। बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारे लगाए और मानवाधिकारों की रक्षा की मांग की।जुलूस के पश्चात माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वहां हो रही हिंसा व हत्याओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।मुस्लिम समाज ने वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में बांग्लादेश को प्रस्तावित 60 करोड़ रुपये की सहायता राशि पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।

उनका कहना है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जारी हैं, तब वहां की सरकार को आर्थिक सहायता देना अनुचित है।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि भारत सरकार को मानवीय आधार पर मदद करनी ही है, तो वह सीधे पीड़ित हिंदू परिवारों तक पहुंचे। सरकार को दी जाने वाली सहायता राशि अत्याचारों को परोक्ष रूप से संरक्षण देने जैसी है। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मुशीर ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि इंसानियत और न्याय की आवाज है। आज मुसलमान अपने हिंदू भाइयों के साथ खड़े हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि अत्याचार के खिलाफ पूरा समाज एकजुट है।उन्होंने कहा कि यह देश की जनता के खून-पसीने की कमाई है और इसे ऐसे देश को नहीं दिया जा सकता, जहां अल्पसंख्यकों का खुलेआम दमन हो रहा हो। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। मुस्लिम समाज ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञापन पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल यह जुलूस मानवता, न्याय और भाईचारे के पक्ष में एक मजबूत और शांतिपूर्ण संदेश बनकर सामने आया।




