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बिजली विभाग और कॉलोनाइजरों के सांठगाठ, बांस के खंबे से लटक रही तार से कालोनीवासियों में करंट का डर।

बिजली विभाग और कॉलोनाइजरों के सांठगांठ और लापरवाही के चलते कॉलोनीवासी मुसीबत के बीच रह रहे हैं। बिजली का करंट इन्हें बरसात में ज्यादा सताता है, अवैध रूप से कालोनियां बना ली गई है जहां बिजली विभाग भी खंभा लगाने से कतरा रहे है। बिजली के पोल नहीं होने से बांस का खंबा लगाया गया है, खंभे से होकर तार गुजारा जा रहा है। जमीन से लटकते तार से कई बार हादसे हो चुके हैं। उसके बावजूद अवैध कॉलोनी बनाने वाले के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है, और न ही बिजली विभाग कोई एक्शन ले रहा है, जिससे करेंट के साए में कॉलोनी वासी रहने मजबूर हैं।

शहर से लगे क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग की बाढ़ आ गई है ।वही कॉलोनाइजर रेरा के नियमों के विपरीत कालोनियां बनाकर बेच रहे हैं, जहां बिजली के खभों की कोई व्यवस्था नहीं होने से कॉलोनी वासी अपनी व्यवस्था कर तार घरों तक पहुंचा रहे हैं। आप देख सकते हैं पत्रकार कॉलोनी बिरकोना से लगा यह क्षेत्र यहां बिजली के खंभे नहीं होने के चलते बांस गाडकर बिजली के तार घरों तक पहुंचाय गए हैं। तार जमीन तक लटके हुए हैं, मुख्य मार्ग से मवेशी और लोगों का आना-जाना होता है। जिससे करंट की चपेट में आकर आये दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों का कहना है की कॉलोनी तो बना दी जाती है लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जाता और बिल्डर बेचकर भाग जाते हैं। वार्ड वासियों का कहना है कि बिजली विभाग को भी खंभा लगाने कहा गया है उनका कहना है कि इसकी अनुमति नहीं ली गई है, तो खंभा नहीं लगाया जा सकता। मजबूरी में हमें तार बांस के सहारे घरों तक पहुंचाना पड़ रहा है।

ऐसे नजारे आपको गांव में देखने को मिलेंगे लेकिन शहर से लगे पॉश कॉलोनी में इस तरह के खतरनाक दृश्य चिंताजनक है। क्योंकि पास में ही अशोकनगर में सब स्टेशन है यहां अधिकारियों का कार्यालय है। उसके बावजूद भी कार्यालय से कुछ दूरी पर इस प्रकार की लापरवाही बिजली विभाग की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता हैं। वही बरसात में तो खतरा और भी बढ़ जाता है क्योंकि तेज आंधी में यह तार टूट कर जमीन पर गिर जाते हैं। जिससे पिछली बार एक जान भी जा चुकी है,और कई मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं। बिजली विभाग को लोगो की मांग की ओर ध्यान देना चाहिए। वही बिल्डर और कॉलोनाइजरो पर भी रेरा का शिकंजा कसना जरूरी है।

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