बिलासपुर तोरवा छठ घाट में भी पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच द्वारा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया।
बंगाल की तरह ही मिथिलांचल में भी सरस्वती पूजा की समृद्ध परंपरा रही है। जहां शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक आयोजनों के साथ प्रत्येक घर में बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा उपासना की जाती है। बिलासपुर में रहने वाले प्रवासी मिथिलांचल और बिहार के वाशिंदे भी इस परंपरा का पालन करते देखे जाते हैं ।पिछले 22 वर्षों की भांति इस वर्ष भी तोरवा छठ घाट सामुदायिक भवन में भव्य रूप से सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। बिलासपुर में सरस्वती पूजा के चुनिंदा बड़े आयोजन होते हैं, जिनमें से पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच का आयोजन भी एक है । यहां देवी सरस्वती की मनमोहन प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना की गई। देवी को पारंपरिक रूप से मालपुआ और खीर का प्रसाद अर्पित किया गया जिसे प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया गय।
बिलासपुर के छठ घाट में पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच द्वारा छठ पूजा के अतिरिक्त सरस्वती पूजन का भी बड़ा आयोजन किया जाता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष में वीणा वादिनी की पूजन के अवसर पर समाज के लोग बड़ी संख्या में जुटे ।इस अवसर पर यहां भजन कीर्तन का भी आयोजन किया गया । समाज के सभी वर्गों में एकजुटता लाने और रोचकता बनाए रखने के उद्देश्य से इस अवसर पर बच्चों और महिलाओं के लिए विविध खेल स्पर्द्धाओं का भी आयोजन किया गया
इनके विजेताओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए।
हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजन समिति द्वारा यहां भोग भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होकर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया । छठ घाट पर इस अवसर पर दिनभर विविध आयोजन होते रहे ।शाम को आरती और भजन कीर्तन का आयोजन किया गया । गुरुवार दोपहर बाद यहां देवी प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। इस अवसर पर समाज के बुजुर्ग , बच्चे महिलाएं सभी बड़ी संख्या में उपस्थित हुई , जिन्होंने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर उनसे विद्या और कला क्षेत्र में सफलता का आशीर्वाद मांगा।
बिलासपुर तोरवा छठ घाट में भी पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच द्वारा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया। असयोजन का यह 23 वा साल है । इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ।








