
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अपने दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एसईसीआर जोनल कार्यालय में रेलवे अधिकारियों, यूनियनों और एसटी-एससी कर्मचारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में पदोन्नति, आरक्षण और कर्मचारियों की शिकायतों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्या ने कहा कि भारत सरकार के जितने भी विभाग हैं, उनकी नियमित समीक्षा की जाती है। खासकर कर्मचारियों से जुड़े मामले, प्रमोशन, रोस्टर और आरक्षण व्यवस्था पर गहराई से चर्चा होती है।बिलासपुर में हुई बैठक भी इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रही।बैठक के दौरान मैनेजमेंट, यूनियन और एसटी-एससी संगठन से अलग-अलग वार्ता की गई। आयोग का मानना है कि यूनियन और स्टाफ के बीच अच्छा सामंजस्य है। रेलवे विभाग की महत्ता को देखते हुए आयोग ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।हालांकि मीटिंग से पहले ही एसटी-एससी संगठन के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्या ने आयोग को गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।

संगठन ने आरोप लगाया कि बिलासपुर जोनल ऑफिस के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लंबे समय से एसटी-एससी वर्ग के अधिकारी और कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।संगठन ने यह भी कहा कि बिलासपुर रेलवे जोन देश का इकलौता जोन है जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। आदेश के मुताबिक एचडीएफसी कर्मचारियों की पदोन्नति बरकरार रखी जानी चाहिए, लेकिन यहां पिछले दो वर्षों से एसटी-एससी कर्मचारियों को प्रमोशन से वंचित किया जा रहा है।

जब मीडिया ने इस मामले पर राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष से सवाल किया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि मैं देखता हूं, ऐसा कुछ नहीं चल रहा है।इसके बाद वह मुस्कुराते हुए बैठक स्थल से निकल गए। अब कर्मचारियों की निगाहें आयोग पर हैं कि क्या उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या यह मामला यूं ही दबकर रह जाएगा। बिलासपुर जोनल कार्यालय में हुई यह बैठक भले ही औपचारिक चर्चा तक सीमित नजर आई हो, लेकिन कर्मचारियों और संगठनों की उम्मीदें अब भी कायम हैं। वे चाहते हैं कि राष्ट्रीय आयोग उनकी समस्याओं को न सिर्फ सुने, बल्कि उस पर ठोस कार्रवाई भी करे। सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय आयोग के स्तर से कोई सख्त कदम उठाया जाएगा या फिर यह मामला अन्य शिकायतों की तरह सिर्फ कागजी कार्रवाई में सिमटकर रह जाएगा।




