
बिलासपुर में ज्वेलरी कारोबारी से लूट और हमले के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। हालांकि घटना के बाद हुई सक्रियता ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासा गुड़ी में इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए डीआईजी रजनेश सिंह ने बताया कि महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक को हथियार दिखाकर मारपीट और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।आरोपियों के पास से हथियार, नकदी और लूटा गया सामान बरामद किया गया है।

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और पूछताछ में कई वारदातों का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने लूट के साथ-साथ हत्या की साजिश और अन्य आपराधिक योजनाओं की भी जानकारी दी है।जांच में सामने आया कि प्रॉपर्टी विवाद के चलते कारोबारी की हत्या की सुपारी तक दी गई थी और पहले भी हमला करने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा त्योहार के समय एक ज्वेलर्स की दुकान को निशाना बनाने की योजना भी बनाई गई थी। घटना के बाद बिलासपुर पुलिस ने तकनीकी और लोकल इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश तक दबिश दी और आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिलने का दावा किया है।पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी की दिनचर्या और लोकेशन की रेकी कर वारदात को अंजाम दिया।

लूट के दौरान मारपीट में कारोबारी गंभीर रूप से घायल हुए थे और आरोपियों ने सोना, नगदी और अन्य सामान लेकर फरार हो गए थे। बरामदगी में नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण, धारदार हथियार, देसी कट्टा और वारदात में इस्तेमाल वाहन शामिल बताए गए हैं। पुलिस इसे बड़ी सफलता बता रही है और गिरोह के नेटवर्क की आगे जांच जारी है।हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी साजिश और रेकी के बावजूद पुलिस को पहले भनक क्यों नहीं लगी। शहर में कारोबारी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता देखी जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले को बड़ी उपलब्धि बता रही है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की खामियों और अपराधियों के नेटवर्क पर पहले नियंत्रण न होने को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि आगे ऐसी वारदातों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।




