Site icon Grand Gumber News

बिलासपुर में दूषित पानी की आपूर्ति से बढ़ी चिंता नालियों से गुजरती पाइपलाइन, स्वास्थ्य पर खतरा

बिलासपुर में पेयजल व्यवस्था की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। शहर के कई वार्डों में पेयजल पाइप लाइनें नालियों और नालों के बीच से होकर गुजर रही हैं, जिससे स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। शहर में कराए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि बिलासपुर के 59 वार्डों में पेयजल पाइप लाइनें सीधे नालियों में डूबी हुई हैं। इससे मलमूत्र युक्त गंदा पानी पाइप लाइन में रिसने की आशंका बनी रहती है, जिससे डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट की अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।तालापारा, तारबाहर, सरकंडा और तिफरा जैसे इलाकों में पहले भी दूषित पानी की आपूर्ति के कारण लोगों के बीमार पड़ने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालात यह हैं कि नागरिकों को आज भी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 से 2017 के बीच जल आवर्धन योजना के तहत करीब 81 करोड़ रुपये और अमृत मिशन के अंतर्गत लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च कर शहर में 276 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई थी। बावजूद इसके, कई इलाकों में अलग-अलग योजनाओं की दो से तीन पाइप लाइनें एक ही स्थान पर बिछी होने से समस्या और गंभीर हो गई है।इस मामले पर नगर निगम की महापौर पूजा विधानी ने कहा कि नालियों से होकर गुजर रही पुरानी पाइप लाइनों को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही पुराने और नए दोनों वार्डों में कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नगर निगम को घेरते हुए साफ पानी उपलब्ध नहीं करा पाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता प्रमोद नायक ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है, जो नगर निगम की बड़ी विफलता है। अब देखना होगा कि निगम के वादे कब ज़मीनी हकीकत बनते हैं और शहरवासियों को कब शुद्ध पेयजल नसीब होता है।

Exit mobile version