
बिलासपुर :- बिलासपुर रेलवे ओएचई तार के चपेट में आकर झुलसे प्रताप बर्मन के मामले में नया मोड़ सामने आया है। मृतक का परिवार और आंदोलन में शामिल संजीव बर्मन ने मंगलवार देर रात बताया कि मृत शरीर को अब मुक्ति देने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि शव जिला अस्पताल में पांच दिनों से पड़ा हुआ था।परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले का पालन करते हुए कहा कि रेलवे, राज्य सरकार और संबंधित ठेकेदार से मुआवजे का आश्वासन मिला है। रेलवे की ओर से 16.5 लाख, राज्य सरकार से 5 लाख और ठेकेदार की तरफ से 5 लाख रुपए दिए जाने का प्रस्ताव है।मृतक की पत्नी खुश्बू बर्मन को शैक्षणिक योग्यता के अनुसार कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नौकरी देने का भी निर्णय लिया गया है। यह नौकरी केंद्रीय कल्याण श्रम बोर्ड के अधीन न्यूनतम मजदूरी दर पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से होगी।मृतक के परिवार और भीम आर्मी के समर्थक लगातार सात दिनों से डीआरएम कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने प्रताप बर्मन के अस्पताल में भर्ती रहने से लेकर मौत के बाद तक निरंतर आंदोलन किया।धरने के दौरान प्रदर्शनकारी धूप और बारिश में त्रिपाल ओढ़कर बैठकर न्याय की मांग करते रहे। मंगलवार रात भी भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा।इन सभी प्रयासों के बाद रेलवे और संबंधित विभागों ने परिवार को मुआवजा और नौकरी देने का आश्वासन दिया। इससे परिवार को राहत मिली और मामला निपटाने की दिशा में कदम बढ़ा है।




