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बिलासपुर लोकसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद पहली बार शहर पहुंचे देवेंद्र यादव का रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत।

बिलासपुर लोकसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद पहली बार शहर पहुंचे देवेंद्र यादव का रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है उसका ईमानदारी से निर्वहन करेंगे, बिलासपुर के लिए भले ही नये हो लेकिन इस शहर से उनका पुराना नाता है। ईडी की जांच का चुनाव प्रचार के दौरान असर के प्रश्न पर बड़ी बेबाकी से टालते हुए केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई महंगाई की ओर मोड़ दिया, कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद वे मां महामाया के दर्शन करने रतनपुर रवाना हो गए।

लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस पार्टी ने बिलासपुर लोकसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया है, भिलाई के देवेंद्र यादव गुरुवार को शहर पहुंचे, बिलासपुर रेलवे स्टेशन में उनका भव्य स्वागत किया गया। यहां उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की और कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसका निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि बिलासपुर से उनका पुराना नाता रहा है, भले ही वे बिलासपुर के आम अवाम के लिए नए हो, लेकिन उनका नाता पहले से है। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिलासपुर रेलवे जोन का सेंट्रल जोन में सबसे बड़ा योगदान है, सर्वाधिक आय इसी जोन से होती है। उसके बावजूद यहां यात्री ट्रेनों के लिए मारामारी होती है। केंद्र सरकार ने हमेशा इस जोन की अपेक्षा की है। वही ईडी के जांच का चुनाव प्रचार के दौरान प्रभाव के प्रश्न को टालते हुए, उन्होंने कहा कि कांग्रेस का हर सिपाही साथ खड़ा है।

कांग्रेस से सांसद प्रत्याशी यादव ने केंद्र सरकार पर महंगाई का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि महंगाई चरम पर है, वही बिलासपुर रेलवे जोन की लगातार उपेक्षा की जा रही है। कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद प्रत्याशी देवेंद्र मां महामाया के दर्शन करने रतनपुर के लिए निकल गए। इस दौरान जगह-जगह उनका भव्य स्वागत भी किया गया। कांग्रेस ने दुर्ग विधायक देवेंद्र यादव को भले ही बिलासपुर से लोकसभा प्रत्याशी बनाया है लेकिन उनकी राह आसान नहीं है।

बिलासपुर में स्थानीय दावेदार उनका विरोध कर रहे हैं। उन्हें बाहरी और दागी नेता बताया जा रहा है क्योंकि उनके खिलाफ करीब 9 मामले दर्ज है। प्रत्याशी के तौर पर देवेंद्र यादव के का नाम घोषित हो जाने के बावजूद अभी भी जगदीश कौशिक और चंद्र प्रदीप वाजपेई जैसे कांग्रेसी नेता अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं, जो स्थानीय संगठन के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।

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