
बिलासपुर शहर की सांस्कृतिक पहचान बिलासा ताल’ को उसकी पुरानी गरिमा लौटाने की तैयारी तेज हो गई है। एक बार फिर तालाब के ऊपर पुल का निर्माण किया जाएगा, जो न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि शहरवासियों को फिर से मिलेगा वही पुराना सुकूनभरा नज़ारा। हाल ही में हुए उच्चाधिकारियों के निरीक्षण के बाद यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बिलासा ताल बिलासपुर शहर का वह ऐतिहासिक और रमणीय स्थल, जहाँ कभी पुल पर चलते हुए लोगों को एक खास अनुभूति होती थी।वर्षों पहले बना ब्रिज यहां की पहचान था और अब उसे फिर से लौटाने की तैयारी है। हाल ही में तालाब क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे उच्चाधिकारियों ने पुराने अनुभवों को साझा किया और प्रस्ताव को प्राथमिकता देने की बात कही।

पुराने पुल के स्थान पर अब नए आधुनिक ब्रिज का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।जिसकी अनुमानित लागत करीब 18 लाख 60 हजार रुपये है।हालांकि इससे पहले तालाब क्षेत्र में हैंगिंग ब्रिज बनाने का प्रयास किया गया था। इसके लिए मार्च में 26 लाख रुपये भी मिले थे। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों और उपयुक्त ठेकेदारों की अनुपलब्धता के चलते उस प्रस्ताव को रद्द करना पड़ा। अब वन विभाग ने एक नया और सरल प्रस्ताव तैयार किया है जो पुराने ब्रिज के स्वरूप से प्रेरित है। प्रस्ताव को शासन को भेजा गया है और उम्मीद है कि जल्दी ही स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहरवासी और पर्यटक दोनों ही बेसब्री से उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब बिलासा ताल पर फिर से पुल दिखाई देगा और तालाब के बीचों-बीच टहलने का अनुभव लौटेगा। यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि शहर की स्मृतियों और पहचान से जुड़ा एक अहसास है।




