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बेलतरा में वोट चोरी का आरोप कांग्रेस का बड़ा दावा, मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा — मृत घोषित जीवित वोटर पेश

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कांग्रेस ने बेलतरा विधानसभा में बड़े पैमाने पर वोट चोरी और मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने सुनियोजित तरीके से हजारों मतदाताओं के नाम सूची से हटवाए और कई गड़बड़ियां कीं। जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण के अध्यक्ष विजय केसरवानी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर आरोपों के साथ सबूत भी पेश किए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कांग्रेस ने एक ऐसे मतदाता को मंच पर पेश किया जिसे सूची में मृत घोषित कर दिया गया था, जबकि वह जीवित है। बेलतरा विधानसभा में कथित वोट चोरी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है।

जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण के अध्यक्ष विजय केसरवानी ने आरोप लगाया है कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केसरवानी ने कहा कि स्थानीय मतदाताओं को बाहरी दिखाकर उनके नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि बिना सत्यापन के मतदाता नामों को काटा गया, जबकि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाया है।केसरवानी ने कहा कि शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं ।जिसमें 51 मतदाता 100 वर्ष से अधिक उम्र के दर्ज होना,7 लोगों की मृत्यु हो चुकी, फिर भी उनका नाम सूची में होना,7 मतदाताओं की आयु गलत दर्ज होना,40 निवासी यहीं रहते हुए भी बाहर का दिखाया जाना,490 मतदाताओं के मकान नंबर गलत दर्ज करना जैसे मामले प्रमुख हैं।

कांग्रेस नेता ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि एक जीवित मतदाता को मृत घोषित कर मतदाता सूची से हटाया गया, और इसे साबित करने के लिए उस शख़्स को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बुलाया गया।कांग्रेस का आरोप है कि यह “वोट चोरी की योजनाबद्ध साज़िश” है और बेलतरा विधानसभा में हेरफेर कर चुनाव जीता गया।विजय केसरवानी ने कहा कि स्पेशल समरी रिवीजन प्रक्रिया भी निष्पक्ष नहीं है और पार्टी इसका विरोध करेगी। कांग्रेस ने मांग की है कि मतदाता सूची की पुनः जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।कांग्रेस ने बेलतरा में मतदाता सूची को लेकर बड़ा आरोप लगाया है और इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया है। अब सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग इस पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा।

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