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भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को महिलाओं ने मनाया बहुला चौथ, पूरी विधि विधान के साथ की गायों की पूजा।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार बच्चों की सुरक्षा के लिए मनाया जाता है महिलाएं इस दिन गायों की पूजा करती हैं। इसके अलावा मिट्टी से शिव पार्वती, कार्तिकेय और गणेश की मूर्तियां बनाकर पूजा की जाती है। स्वयं श्रीकृष्ण ने इस दिन के महत्व पर जोर दिया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन के प्रभाव से संतान को जीवन में सारी खुशियां मिलती हैं। शास्त्रों में गायों का विशेष महत्व माना जाता है। जो महिलाएं गाय की पूजा करती हैं उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है और साथ ही संतान पर आने वाली परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण शेर के रूप में बहुला गाय के सामने प्रकट हुए।

बहुला गाय ने जब अपने समक्ष शेर खड़ा देखा तो वह अपने प्राण त्यागने को तैयार थी, लेकिन उसने शेर से अपने बच्चे को दूध पिलाने की अनुमति मांगी और कहा कि इसके बाद वह स्वयं शेर के भोजन का निवाला बन जाएगी। जब शेर ने गाय का बछड़े के प्रति प्रेम देखा तो उसने बहुला गाय को छोड़ दिया। वादे के मुताबिक गाय ने अपना काम पूरा किया और शेर के सामने आ गई भगवान कृष्ण बहुला की धर्मपरायणता और भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्होंने बहुला को आशीर्वाद दिया कि कलियुग में जो भी उसकी पूजा करेगा, उसकी संतान हमेशा खुश और स्वस्थ रहेगी। बिलासपुर अशोक नगर सरकंडा में वहां रहने वाली गृहणीयो ने बहुत धूमधाम से बहुला व्रत कर भगवान की आराधना की और विधि विधान से पूजा किया।

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