Site icon Grand Gumber News

मानसून से पहले रेलवे की सुरक्षा कवायद तेज, पहाड़ों पर चट्टानें रोकने लगाए गए लोहे के कवच बिलासपुर मंडल के संवेदनशील रेलमार्गों पर सक्रिय निगरानी तंत्र और पेट्रोलिंग शुरू

मानसून के आगमन से पहले रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। खासकर जंगलों और पहाड़ों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर खतरे को देखते हुए रेलवे ने चट्टानों और मिट्टी के खिसकने की आशंका को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। छत्तीसगढ़ का बिलासपुर रेल मंडल देश के प्रमुख रेल मार्गों में से एक है, जहां से होकर कई अहम ट्रेनें गुजरती हैं। इस मंडल के कई सेक्शन घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच से होकर निकलते हैं, जहां बारिश के दौरान भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बना रहता है।रेलवे ने इन जोखिमों से निपटने के लिए पहाड़ियों के किनारे मजबूत लोहे की जालियां लगाई हैं। ये जालियां मिट्टी और चट्टानों को ट्रैक पर गिरने से रोकने का काम करेंगी। इससे पहले कटनी रेलखंड जैसे इलाकों में यह प्रयोग सफल साबित हो चुका है, और अब बिलासपुर मंडल में भी इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है।संवेदनशील सेक्शनों में 24 घंटे का निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।

ट्रैक के हर हिस्से पर नजर रखने के लिए गश्ती दल तैनात किए गए हैं, जो किसी भी असामान्य गतिविधि की तत्काल सूचना संबंधित अधिकारियों को देंगे। मानसून पेट्रोलिंग को इस बार और अधिक सशक्त किया गया है।नदियों, नालों या जलभराव संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। बारिश के तेज बहाव से ट्रैक को बचाने के लिए विशेष इंजीनियरिंग कार्य किए जा रहे हैं। वहीं, पेड़ों की छंटाई, तारों की मरम्मत और ओएचई सिस्टम की जांच जैसे काम भी युद्ध स्तर पर चल रहे हैं।सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि सिग्नल, इलेक्ट्रिकल और टेलीकम्युनिकेशन विभाग भी एकजुट होकर तैयारियों में जुटे हैं। रेलवे की कोशिश है कि बारिश के मौसम में भी ट्रेनों का परिचालन सुचारू रहे और यात्रियों की सुरक्षा में कोई चूक न हो। मानसून से पहले रेलवे ने हर मोर्चे पर सुरक्षा के पेंच कस दिए हैं।

Exit mobile version